आगरा:
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और एक शिक्षिका के विरुद्ध गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज कराने हेतु मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने थाना शाहगंज को जाँच के आदेश देते हुए 30 जनवरी तक आख्या (रिपोर्ट) तलब की है।
जानिये क्या है पूरा मामला ?
शमशाबाद रोड (थाना सदर) निवासी प्रार्थी शैलेन्द्र दीक्षित ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रश्मि शर्मा (शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय भिड़ावली, इरादत नगर) ने पद का दुरुपयोग और धोखाधड़ी की है।
प्रार्थी के अनुसार:
* मिड-डे मील के धन का दुरुपयोग: प्रार्थी ने आरोप लगाया कि विवाह से पूर्व ही, 11 सितंबर 2020 को शिक्षिका रश्मि शर्मा ने मिड-डे मील के ₹374/- उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे। इसकी शिकायत जब बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी (सैयां) से की गई, तो उन्होंने शिक्षिका पर कार्रवाई करने के बजाय उसे बचाने का प्रयास किया।
* फर्जी दस्तावेजों पर दाखिला: आरोप है कि शिक्षिका ने अपनी पुत्री (जो उनके पूर्व पति से है) का केंद्रीय विद्यालय से नाम कटवाए बिना, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने ही सरकारी स्कूल में दाखिला करा दिया। इस प्रक्रिया में प्रार्थी (शैलेन्द्र दीक्षित) का नाम फर्जी तरीके से बच्ची के पिता के रूप में दर्ज किया गया।
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विवाद की पृष्ठभूमि:
प्रार्थी और शिक्षिका दोनों पूर्व से तलाकशुदा थे और नवंबर 2020 में दोनों का विवाह हुआ था।
शैलेन्द्र दीक्षित का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद रश्मि शर्मा ने उन्हें उनके ही फ्लैट में आने से रोक दिया और अक्टूबर 2021 में सारा सामान लेकर चली गईं।
इसके बाद शिक्षिका ने प्रार्थी के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न और मारपीट का मुकदमा भी दर्ज कराया था।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल:
प्रार्थना पत्र में न केवल शिक्षिका, बल्कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए ) और खंड शिक्षा अधिकारी (ब्लॉक सैयां) को भी आरोपी बनाने की मांग की गई है।
प्रार्थी का कहना है कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बावजूद इन अधिकारियों ने कोई कानूनी कदम नहीं उठाया, जो उनकी मिलीभगत को दर्शाता है।
न्यायालय का आदेश:
अदालत ने प्रार्थी के तर्कों को सुनने के बाद थाना शाहगंज को इस पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
अब 30 जनवरी को होने वाली सुनवाई में पुलिस की आख्या के आधार पर तय होगा कि अधिकारियों और शिक्षिका के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होगा या नहीं।
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