आगरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज लिमिटेड (TVS Credit Services Ltd.) द्वारा एक उपभोक्ता पर लगाई गई 91,229/- रुपये की अनुचित पेनल्टी को रद्द कर दिया है।
इसके साथ ही, आयोग ने फाइनेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को ‘नो ड्यूज प्रमाण पत्र’ जारी करे।
आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 20,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
आगरा के खंदौली थाना क्षेत्र स्थित गढ़ी देशा के निवासी बसंत कुमार ने अक्टूबर 2019 में एक सोनालिका ट्रैक्टर खरीदने के लिए टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज से 4,57,000/- रुपये का फाइनेंस कराया था।
इस ऋण की अदायगी के लिए 41,049/- रुपये की 16 त्रैमासिक किश्तें निर्धारित की गई थीं, जिनका भुगतान 5 जनवरी 2020 से 5 अक्टूबर 2023 के बीच किया जाना था।
परिवादी का कहना था कि उसने सभी किश्तों का नियमित भुगतान किया, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि होने के बावजूद फाइनेंस कंपनी ने किश्तों की कटौती नहीं की। बाद में परिवादी द्वारा संपूर्ण बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया।
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पेनल्टी का विवाद और अनुचित व्यवहार:
जब बसंत कुमार नो ड्यूज प्रमाण पत्र लेने कंपनी के शाखा कार्यालय गए, तो उन्हें बताया गया कि कोरोना काल की किश्तों के भुगतान में देरी के कारण उन पर 91,228/- रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
परिवादी का आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने उनकी बात सुने बिना उन्हें अपमानित कर कार्यालय से भगा दिया।
इसके बाद उपभोक्ता ने 25 जुलाई 2024 को कंपनी को एक विधिक नोटिस भेजा, जिसके जवाब में फाइनेंस कंपनी ने 93,079/- रुपये की पेनल्टी की मांग की। परेशान होकर उपभोक्ता ने 31 अगस्त 2024 को उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया।
आयोग का निष्कर्ष और फैसला:
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान फाइनेंस कंपनी की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।
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आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान किश्तों की अदायगी की अवधि पर राहत दी गई थी।
ऐसे में फाइनेंस कंपनी द्वारा इस अवधि के लिए उपभोक्ता पर पेनल्टी लगाना और नो ड्यूज प्रमाण पत्र रोकना सीधे तौर पर ‘सेवा में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार संव्यवहार’ है।
आयोग ने आदेश दिया है कि टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज 45 दिन के भीतर 91,229/-रुपये की पेनल्टी निरस्त करे और क्षतिपूर्ति राशि (कुल 25,000/- रुपये) आयोग के खाते में जमा करे।
यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर ऐसा करने में विफल रहती है, तो उसे परिवाद दायर करने की तिथि (31 अगस्त 2024) से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 9 प्रतिशत का वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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