आगरा।
फतेहपुर सीकरी के प्रतिबंधित एवं संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण कराने के आरोपी को जिला अदालत से बड़ी राहत मिली है।
एडीजे-8 माननीय संजय के. लाल ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषमुक्त करने के आदेश दिए हैं।
निचली अदालत ने सुनाई थी दो वर्ष की कैद:
विदित हो कि इस मामले में ग्राम न्यायालय किरावली के न्यायिक अधिकारी ने 19 दिसंबर 2023 को आरोपी राजू, पुत्र हाजी नबाब (निवासी तेहरा दरवाजा, फतेहपुर सीकरी) को दोषी करार दिया था।
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तब अदालत ने उसे दो वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
क्या था मामला ?
मामले के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सब-सर्किल फतेहपुर सीकरी के कर्मी ज्ञान सिंह ने वर्ष 2014 में थाना फतेहपुर सीकरी में मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि राजू ने एएसआई द्वारा संरक्षित क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण कराया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल अवशेष अधिनियम की धारा 30 (क) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
गवाहों के बयानों में विरोधाभास बना जीत का आधार:
अपील पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता हैदर अली ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को गलत तरीके से दंडित किया गया है।
एडीजे-8 माननीय संजय के. लाल ने पत्रावली का अवलोकन करने और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद पाया कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं।
अदालत ने गवाहों के बयानों में मौजूद विसंगतियों को आधार मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी राजू को दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।
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