आगरा:
विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) माननीय विवेक कुमार की अदालत ने अवैध गांजा बरामदगी के मामले में एक आरोपी को पुलिस की कार्यप्रणाली में पाई गई गंभीर खामियों के आधार पर बरी करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने माना कि पुलिस ने बरामदगी के दौरान न तो स्वतंत्र गवाहों को शामिल किया और न ही NDPS एक्ट के अनिवार्य विधिक प्रावधानों का पालन किया।
क्या था मामला ?
थाना कमला नगर में दर्ज मामले के अनुसार, 19 दिसंबर 2021 को उप-निरीक्षक सुनील कुमार अपनी टीम के साथ क्षेत्र में गश्त पर थे। पुलिस का आरोप था कि लोहिया नगर, बलकेश्वर निवासी प्रवीन उर्फ हप्पू पुलिस को देखकर तेजी से अपने घर में घुस गया।
शक होने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली, जहां से कथित तौर पर 1 किलो 280 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
कोर्ट में अभियोजन का पक्ष:
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से वादी मुकदमा उप-निरीक्षक सुनील कुमार, विवेचक राजीव कुमार गुप्ता और पुलिसकर्मी राजेंद्र सिंह को गवाह के रूप में पेश किया गया।
बरी होने के मुख्य आधार:
आरोपी के अधिवक्ता सत्येन्द्र पाल सिंह चौहान ने अदालत में प्रभावी दलीलें पेश कीं, जिन्हें स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
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फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
* स्वतंत्र गवाह का अभाव: पुलिस ने घर में घुसकर तलाशी और बरामदगी का दावा किया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्वतंत्र या स्थानीय गवाह को शामिल नहीं किया गया।
* कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: अदालत ने पाया कि बरामदगी के समय NDPS एक्ट के तहत निर्धारित अनिवार्य विधिक प्रक्रियाओं (जैसे धारा 42 और 50 का पालन) की अनदेखी की गई।
* पुलिस की लापरवाही: गवाहों के बयानों में विरोधाभास और प्रक्रियात्मक चूक के कारण अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार ने बचाव पक्ष के तर्कों को न्यायसंगत मानते हुए प्रवीन उर्फ हप्पू को रिहा करने का आदेश दिया।
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