चैक बाउंस मामले में दोषी को 6 माह का कारावास और ₹2.40 लाख का जुर्माना

चेक न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा:

न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-12) के पीठासीन अधिकारी माननीय अनुभव सिंह ने चैक डिसऑनर के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी मलखान सिंह को दोषी करार दिया है।

अदालत ने दोषी को 6 माह के साधारण कारावास के साथ 2 लाख 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

वादी रमेश चंद (निवासी नगला पदी, न्यू आगरा) और आरोपी मलखान सिंह (निवासी दयानंद नगर, दयालबाग) के बीच घनिष्ठ मित्रता और पारिवारिक संबंध थे।

* लेनदेन: वर्ष 2018 में मलखान सिंह ने रमेश चंद से 2 लाख रुपये उधार लिए थे और 6 माह में वापस करने का वादा किया था।

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* चैक बाउंस: वादे के अनुसार भुगतान न करने पर, तगादे के बाद आरोपी ने 20 सितंबर 2018 को 2 लाख रुपये का एक चैक दिया। बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चैक ‘डिसऑनर’ (बाउंस) हो गया।

* कानूनी कार्रवाई: विधिक नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान न मिलने पर वादी ने न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय का निर्णय:

पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपी अपनी देनदारी चुकाने में विफल रहा है।

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जुर्माने का वितरण:

* कुल अर्थदंड: ₹2,40,000/-

* वादी को क्षतिपूर्ति: ₹2,30,000/- (रमेश चंद को मिलेंगे)

* राज्य कोष में: ₹10,000/- (सरकारी खाते में जमा होंगे)।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चैक अनादरण (Negotiable Instruments Act) के मामलों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

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विवेक कुमार जैन
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