कोर्ट ने बिना कारण बताए की गई गिरफ्तारी को अवैध ठहराया, मैनपुरी के दो युवकों को तत्काल रिहा करने का आदेश
आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कानून की जानकारी न होना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए नियमों के उल्लंघन का वैध बहाना नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मैनपुरी के दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ घोषित करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है।
प्रमुख विधिक बिंदु और कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
* अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित में गिरफ्तारी का कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सीधा उल्लंघन है।
* डीजीपी सर्कुलर की अनदेखी: कोर्ट ने राज्य सरकार के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मैनपुरी के थानाध्यक्ष को डीजीपी द्वारा जुलाई 2025 में जारी उस सर्कुलर की जानकारी नहीं थी, जिसमें गिरफ्तारी के नए नियमों (मेमो) का उल्लेख था।
* अज्ञानता पर प्रहार: खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा यह कहना कि उन्हें उच्चाधिकारियों के निर्देशों की जानकारी नहीं थी, कानून के उल्लंघन के लिए स्वीकार्य नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि:
यह आदेश अनूप कुमार और अभिषेक यादव द्वारा दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर आया है।
* रिमांड आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने मैनपुरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा 20 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेश को रद्द कर दिया।
* वकील की दलील: याचियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए गए थे, जो कि उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है।
* सरकारी पक्ष की स्वीकारोक्ति: अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) ने माना कि कोतवाली प्रभारी ने डीजीपी के सर्कुलर की जानकारी न होने के कारण गलती की, जिसे कोर्ट ने अनुचित करार दिया।
डीजीपी को कड़े निर्देश:
हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में पुनः कड़े निर्देश जारी करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में गिरफ्तारी के दौरान नियमों का पालन हो।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को याचियों के विरुद्ध कानून के अनुसार (नियमों का पालन करते हुए) दोबारा कार्यवाही करने की छूट रहेगी।
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