साक्ष्य के अभाव में हत्या के दो आरोपी बरी, गवाहों के बयानों में था विरोधाभास

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आगरा:

करीब 10 साल पुराने हत्या के एक सनसनीखेज मामले में एडीजे-17 माननीय नितिन कुमार ठाकुर की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

धारदार हथियार से युवक की हत्या के आरोपी गौरव दीक्षित और सोनू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि और विरोधाभास:

यह मामला थाना ताजगंज और शमशाबाद से जुड़ा है। मुकदमे के दौरान वादी के बदलते बयानों ने केस को कमजोर कर दिया:

* पहली तहरीर (जुलाई 2014): वादी विजय कांत ने अपने सगे चाचा फतेह सिंह, वीरेश और उनके सालों पर जमीन की रंजिश के चलते भाई ओमकांत (22 वर्ष) की हत्या का शक जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।

* दूसरी तहरीर (मार्च 2015): घटना के करीब 6 महीने बाद वादी ने अचानक कहानी बदलते हुए गौरव दीक्षित और सोनू को हत्या का आरोपी बनाया।

* घटना: 3 जुलाई 2014 की शाम ओमकांत को कोई घर से बुलाकर ले गया था और अगली सुबह ताजगंज क्षेत्र में सड़क किनारे उसकी लहूलुहान लाश मिली थी।

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अदालत का फैसला:

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने मृतक की पत्नी और वादी समेत सात गवाह पेश किए।

सुनवाई के दौरान निम्नलिखित बिंदु बचाव पक्ष के हक में रहे:

* बयानों में विरोधाभास: गवाहों के बयानों में एकरूपता नहीं थी।

* साक्ष्य की कमी: मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) की कड़ियां आपस में नहीं जुड़ पा रही थीं।

* वरिष्ठ अधिवक्ता के तर्क: आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष दीक्षित ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को रंजिश और बदले हुए बयानों के आधार पर फंसाया गया है।

निष्कर्ष: अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में विफल रहा, जिसके आधार पर दोनों को बरी करने के आदेश दिए गए।

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विवेक कुमार जैन
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