आगरा:
जनपद के विशेष न्यायालय (N.I. Act) ने चेक बाउंस के एक मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी महिला को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने आरोपी श्रीमती श्वेता सिंह को दोषी करार देते हुए 6 माह की कैद और 6 लाख 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
मामले का संक्षिप्त विवरण:
यह आदेश विशेष न्यायालय के पीठासीन अधिकारी माननीय अरविंद कुमार यादव ने वादी चेतेन्द्र सिंह राजपूत द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिया।
* उधार की रकम: वादी और अभियुक्ता के बीच पारिवारिक संबंध थे। घरेलू जरूरतों और मकान निर्माण के लिए वादी ने 5 जुलाई 2019 को श्वेता सिंह को 5 लाख रुपये उधार दिए थे।
* चेक डिसऑनर: दो साल बाद, जब वादी ने पैसे वापस मांगे, तो अभियुक्ता ने केनरा बैंक का 5 लाख रुपये का चेक जारी किया। वादी ने जब इसे अपने बैंक में लगाया, तो चेक ‘डिसऑनर’ (बाउंस) हो गया।
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* कानूनी कार्रवाई: विधिक नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान न होने पर वादी ने अधिवक्ता राजेश यादव एवं अदिति यादव के माध्यम से न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय का फैसला:
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों का अनुशीलन करने के बाद अभियुक्ता को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (N.I. Act) के तहत दोषी पाया।
* क्षतिपूर्ति का आदेश: न्यायालय ने कुल 6.25 लाख रुपये के जुर्माने में से 6 लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति वादी चेतेन्द्र सिंह राजपूत को देने का आदेश दिया है।
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* राजस्व: शेष 25 हजार रुपये की राशि सरकारी खजाने (राज्य सरकार) में जमा की जाएगी।
अदालत का यह फैसला दर्शाता है कि चेक बाउंस के मामलों में अदालतें अब केवल जेल ही नहीं, बल्कि वादी को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए चेक राशि से अधिक का जुर्माना भी लगा रही हैं, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय और पैसा मिल सके।
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