आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2025 में बरेली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के आरोपी नाजिम रज़ा खान की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
नाजिम रज़ा, जिसे मौलाना तौकीर रज़ा खान का करीबी सहयोगी बताया जाता है, पिछले काफी समय से इस मामले में न्यायिक हिरासत में था।
न्यायालय का आदेश:
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की एकल पीठ ने नाजिम रज़ा खान द्वारा दायर आपराधिक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
न्यायालय ने तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को सशर्त जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
केस का विवरण और दलीलें:
* प्राथमिकी (FIR): याची के विरुद्ध बरेली जनपद के बारादरी थाने में हिंसा से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
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* याचिकाकर्ता का पक्ष: याची की ओर से अधिवक्ता इरशाद अहमद और उमर खालिद ने तर्क प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में राजनीतिक द्वेष के चलते संलिप्त किया गया है और घटना में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के साक्ष्य अपर्याप्त हैं।
* राज्य सरकार का विरोध: सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी की उपस्थिति से क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और अपराध की प्रकृति गंभीर है।
दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद, न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मामले के साक्ष्यों के संतुलन को देखते हुए जमानत मंजूर की।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत की अवधि के दौरान आरोपी को विचारण (Trial) में पूरा सहयोग करना होगा और वह गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।
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