आगरा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-9) माननीय विवेक कुमार की अदालत ने हत्या के प्रयास और मारपीट के एक मामले में पिता और उनके दो पुत्रों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है।
अदालत ने पाया कि वादी द्वारा लगाए गए आरोपों और साक्ष्यों में भारी विरोधाभास था। बरी होने वालों में दौलत सिंह और उनके दो पुत्र चेतन जादौन व अरविंद जादौन (निवासी रामजीधाम, सिकंदरा) शामिल हैं।
जानिये क्या था मामला ?
वादी डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह ने थाना मलपुरा में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 10 दिसंबर 2021 की सुबह जब वह अपनी कार से मिर्जापुर गांव के पास जा रहे थे, तब एक बिना नंबर की इनोवा कार में सवार आरोपियों ने उन्हें रोक लिया। आरोप था कि चेतन जादौन ने उन पर तमंचे से फायर किया, जिससे वे बाल-बाल बचे।
दौलत सिंह और अरविंद ने लोहे की रॉड से हमला किया, जिससे वादी के हाथ की हड्डी टूट गई।इसके साथ ही हमलावरों ने उन्हें पुराने मुकदमे की पैरवी छोड़ने की धमकी दी।
इन 5 प्रमुख वजहों से गिरे आरोप:
बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिनेश चंद गुप्ता के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर आरोपियों को बरी किया:
* 22 दिन की देरी: घटना 10 दिसंबर की बताई गई, जबकि रिपोर्ट 2 जनवरी को दर्ज कराई गई। इतनी लंबी देरी का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया।
* लोकेशन का अंतर: घटना के समय वादी के मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल से 10 किलोमीटर दूर पाई गई, जिससे घटना के समय वहां मौजूदगी संदिग्ध हो गई।
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* डॉक्टर का बयान: इलाज करने वाले डॉक्टर ने गवाही दी कि वादी ने उन्हें बताया था कि चोट घर में गिर जाने के कारण आई थी, न कि हमले की वजह से।
* बरामदगी शून्य: पुलिस को घटनास्थल से न तो कोई खोखा कारतूस मिला और न ही आरोपियों की निशानदेही पर कोई हथियार बरामद हुआ।
* सबूतों का अभाव: पुलिस ने अदालत में न तो वादी का कथित टूटा हुआ मोबाइल पेश किया और न ही वे फटे हुए कपड़े, जिनका जिक्र तहरीर में था।
न्यायालय का निष्कर्ष:
अदालत ने अभियोजन पक्ष के कथनों की पुष्टि न होने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के चलते पिता-पुत्रों को दोषमुक्त करार दिया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्हें रंजिशन झूठा फंसाया गया था।
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