आगरा:
आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) को आखिरकार एक महिला उपभोक्ता से नक्शा पास कराने के नाम पर की गई अवैध वसूली भारी पड़ गई।
उपभोक्ता आयोग के आदेश पर ADA को 25 साल बाद 84,839/- रुपये की मूल राशि के बदले ब्याज और हर्जाने सहित 6,89,785/- रुपये का भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ा।
जानिये क्या है पूरा मामला?
मामला मथुरा रोड स्थित लता कुंज की निवासी श्रीमती मंजू कंसल का है। उन्होंने 1998 में चेतना हाउसिंग सोसाइटी के अंतर्गत भरतपुर हाउस में एक प्लॉट खरीदा था।
इस सोसाइटी के लिए कॉलोनाइजर ने पहले ही विकास शुल्क (Development Charges) समेत सभी जरूरी भुगतान ADA को कर दिए थे और कॉलोनी 1984 में ही स्वीकृत हो चुकी थी।
विभाग की लापरवाही और अवैध वसूली
* अगस्त 1998: श्रीमती मंजू ने नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया, लेकिन ADA ने 90 दिनों तक न तो नक्शा पास किया और न ही कोई आपत्ति जताई।
* निर्माण पर रोक: कानूनी नोटिस के बाद जब उन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया, तो ADA कर्मियों ने काम रुकवा दिया और 84,839/- रुपये की अतिरिक्त मांग की।
* मजबूरी में भुगतान: निर्माण कार्य जारी रखने के लिए मंजू कंसल ने विरोध दर्ज कराते हुए यह राशि जमा कर दी और न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
कानूनी लड़ाई का सफर:
मंजू कंसल ने 1999 में उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दायर किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद परिणाम उनके पक्ष में रहे:
* जिला उपभोक्ता आयोग (2002): आयोग ने वसूली को अवैध मानते हुए 84,839/- रुपये वापस करने और 50 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न के तौर पर देने का आदेश दिया।

* राज्य उपभोक्ता आयोग: ADA ने जिला आयोग के फैसले को लखनऊ स्थित राज्य आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी विभाग की दलीलें खारिज कर दी गईं और वादनी के पक्ष में फैसला बरकरार रहा।
25 साल बाद मिला न्याय:
करीब ढाई दशक तक चली इस कानूनी लड़ाई का अंत तब हुआ जब उपभोक्ता आयोग प्रथम के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार ने वादनी को 6,89,785/- रुपये का अकाउंट पेयी चेक सौंपा।
यह राशि मूल रकम, मानसिक क्षतिपूर्ति और पिछले 25 वर्षों के ब्याज को मिलाकर बनी है।
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