दलित उत्पीड़न और धमकी के मामले में दो आरोपी बरी, गवाहों के बयानों में विरोधाभास बना आधार

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आगरा।

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट माननीय शिव कुमार की अदालत ने दलित उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने के मामले में नामजद दो आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।

न्यायालय ने गवाहों के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभास और साक्ष्यों की कमी को आधार मानते हुए यह फैसला सुनाया।

जानिये क्या था मामला ?

थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादिनी सरोज देवी ने आरोप लगाया था कि उनके गांव (नया बांस, शमशाबाद) के रहने वाले विनोद कुशवाह और भोला उर्फ रामगोपाल उन पर दबाव बना रहे थे।

वादिनी का कहना था कि:

* मथुरा के कोसीकलां थाने में दर्ज अपहरण और दुराचार के एक पुराने मामले में वादिनी और उसकी पुत्री की गवाही होनी थी।

* आरोपी लगातार मुकदमा वापस लेने की धमकी दे रहे थे, जिसके डर से वादिनी अपना गांव छोड़कर न्यू आगरा के नगला पदी क्षेत्र में किराए पर रहने लगी थी।

* आरोप था कि 13 सितंबर 2016 की रात आरोपियों ने जबरन घर में घुसकर गाली-गलौज की, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी।

अदालत में क्यों गिरे आरोप ?

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादिनी सहित चार गवाहों को अदालत में पेश किया। हालांकि, बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह ने मजबूती से दलीलें पेश कीं।

अदालत ने पाया कि:

* बयानों में विरोधाभास: गवाहों द्वारा दिए गए बयानों में एकरूपता नहीं थी और उनमें कई गंभीर विसंगतियां पाई गईं।

* साक्ष्यों का अभाव: अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

अदालत का फैसला:

विद्वान न्यायाधीश ने तथ्यों और अधिवक्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी विनोद कुशवाह और भोला उर्फ रामगोपाल को दोषमुक्त (बरी) करने के आदेश जारी किए।

मुख्य बिंदु:

* आरोपी: विनोद कुशवाह एवं भोला उर्फ रामगोपाल (निवासी नया बांस, शमशाबाद)।

* अदालत: विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, आगरा।

* बचाव पक्ष के वकील: वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह

* वर्ष: यह कानूनी प्रक्रिया 2016 में दर्ज मामले से जुड़ी थी।

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विवेक कुमार जैन
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