आगरा।
एस.एन. मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में कार्यरत जूनियर असिस्टेंट रितिका कनोजिया को धोखाधड़ी और मारपीट के मामले में सेशन कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-14) माननीय ज्योत्स्ना सिंह ने सीजेएम कोर्ट द्वारा प्रार्थना पत्र खारिज करने के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने सीजेएम को निर्देश दिया है कि प्रार्थिनी को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान कर इस मामले में पुनः आदेश पारित करें।
क्या है पूरा मामला ?
एस.एन. हॉस्पिटल की कर्मचारी रितिका कनोजिया (निवासी सिकंदरा) ने लखनऊ निवासी शिवानी सिंह, उनके पिता विनोद कुमार सिंह, भाई मयंक सिंह और राहुल कुमार सिंह के विरुद्ध अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। रितिका का आरोप है कि:
* सोशल मीडिया से हुई ठगी: शिवानी सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती की और फिर राहुल कुमार सिंह से पहचान कराई।
* स्टॉक मार्केट का झांसा: राहुल ने स्टॉक मार्केट में भारी मुनाफे का लालच देकर रितिका से 18 लाख 524 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
* प्रॉपर्टी के नाम पर धोखाधड़ी: आरोप है कि शिवानी सिंह ने भी प्रॉपर्टी खरीदने के बहाने रितिका से 12 लाख रुपये लिए और वापस नहीं किए।
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मारपीट और जातिसूचक शब्दों का आरोप
रितिका कनोजिया का आरोप है कि जब उन्होंने अपने पैसों का तगादा किया, तो 27 अक्टूबर 2024 को विपक्षियों ने उनके घर में घुसकर गाली-गलौज और मारपीट की।
साथ ही उनके विरुद्ध जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। प्रार्थिनी के अनुसार, राहुल सिंह खुद को सपा नेता बताता है और उसका आपराधिक इतिहास रहा है।
कानूनी मोड़:
इससे पूर्व, 5 फरवरी 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने रितिका के इस प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ रितिका ने अपने अधिवक्ता पीयूष सागर के माध्यम से सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया।
अदालत का फैसला:
एडीजे 14 माननीय ज्योत्स्ना सिंह ने निचली अदालत (CJM) के आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उसे निरस्त कर दिया। अब इस मामले में सीजेएम कोर्ट को दोबारा सुनवाई कर फैसला लेना होगा, जिससे आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने की उम्मीद फिर से जाग गई है।
मुख्य विवरण:
* प्रार्थिनी: रितिका कनोजिया (जूनियर असिस्टेंट, नेत्र विभाग, SN हॉस्पिटल)।
* आरोपी: शिवानी सिंह, राहुल कुमार सिंह एवं अन्य (निवासी लखनऊ)।
* धोखाधड़ी की राशि: लगभग 18 लाख रुपये।
* अधिवक्ता: पीयूष सागर।
* कोर्ट का आदेश: सीजेएम का आदेश निरस्त, दोबारा सुनवाई के निर्देश
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