आगरा, उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम की धारा-10 के तहत आरोपित एक व्यक्ति को घटना के लगभग 22 साल बाद साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।
यह फैसला विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह की अदालत ने सुनाया।
क्या था मामला ?
मामले के अनुसार, आगरा जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र के नगला तेजा निवासी श्याम पुत्र श्री चन्द को तत्कालीन जिलाधिकारी ने गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर (जिले से बाहर रहने) का आदेश दिया था।
वादी मुकदमा तत्कालीन उपनिरीक्षक वी.पी. वर्मा को 21 जनवरी 2003 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जिला बदर का आरोपी श्याम आदेश के बावजूद अपने घर में छुप कर रह रहा है।
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इस पुष्ट सूचना पर, पुलिस दल ने आरोपी श्याम के घर दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद, आरोपी को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम की धारा-10 के तहत जेल भेज दिया गया था।
22 साल बाद आया फैसला:
करीब 22 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य का अभाव है।
साक्ष्य के अभाव में, अदालत ने आरोपी श्याम को बरी करने का आदेश दिया। आरोपी की तरफ से अधिवक्ता संजय कुमार सिंह एवं हिमांशु जरारी ने मुकदमे की पैरवी की।
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