आगरा ।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में केनरा बैंक (पूर्व में सिंडीकेट बैंक) और बीमा कंपनियों (यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और विडाल हेल्थ टीपीए) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार के लिए संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
आयोग ने सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक एच० बी० एस० यादव और उनकी पत्नी श्रीमती श्रीदेवी यादव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें ₹2,39,534/- की बीमा क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।

क्या था मामला?
परिवादी एच० बी० एस० यादव, जो सिंडीकेट बैंक (वर्तमान केनरा बैंक) से सेवानिवृत्त प्रबंधक हैं, ने ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के तहत अपनी और अपनी पत्नी की पॉलिसी कराई थी। यह योजना सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों के लिए थी और ₹4,00,000/- तक का स्वास्थ्य बीमा कवर करती थी।
परिवादी की पत्नी, श्रीमती श्रीदेवी यादव, को 31 अक्टूबर 2018 को महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज में कुल ₹2,39,534/- का खर्च आया।
परिवादी ने क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन प्रतिपक्षीगण ने यह कहते हुए क्लेम का निपटारा नहीं किया कि पॉलिसी का नवीनीकरण (renewal) नहीं हुआ था और 2017-2018 के लिए प्रीमियम की कटौती नहीं की गई थी।
आयोग का निष्कर्ष:
अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और माननीय सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने अपने निर्णय में लिखा कि:
* उपभोक्ता की श्रेणी: आयोग ने पाया कि प्रीमियम का भुगतान खाते से समय-समय पर किया गया था, जिससे परिवादी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(7) के तहत उपभोक्ता की श्रेणी में आते हैं।
* बैंक की गलती: बैंक ने तर्क दिया कि प्रीमियम की ऑटो कटौती के लिए कोई अंडरटेकिंग नहीं दी गई थी। हालांकि, परिवादी ने 29.07.2017 की अंडरटेकिंग की छायाप्रति प्रस्तुत की। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि यदि बैंक ने वर्ष 2017-2018 के लिए प्रीमियम स्वतः नहीं काटा, तो इसके लिए बैंक उत्तरदायी है, और इससे अनुचित व्यापार संव्यवहार करते हुए सेवा में कमी साबित होती है।
* भुगतान का अधिकार: उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर, आयोग ने माना कि परिवादी अपनी पत्नी के इलाज पर हुए पूरे व्यय ₹2,39,534/- की बीमा क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के अधिकारी हैं।
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आदेशित भुगतान:
न्यायालय ने प्रतिपक्षीगण को आदेश दिया कि वे निर्णय के 45 दिन के अंदर निम्नलिखित भुगतान आयोग के खाते में जमा करें:
* बीमा क्षतिपूर्ति: ₹2,39,534/-
* ब्याज: परिवाद की दिनांक (02.12.2020) से वास्तविक भुगतान की दिनांक तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ।
* मानसिक पीड़ा क्षतिपूर्ति: ₹10,000/-
* वाद व्यय: ₹5,000/-
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि यदि प्रतिपक्षीगण समय पर भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो परिवादी संपूर्ण धनराशि पर 9% वार्षिक साधारण ब्याज प्राप्त करने के हकदार होंगे।
इस आदेश के पालन में केनारा बैंक द्वारा अपने हिस्से की धनराशि ₹1,62,000/- आयोग में जमा करा दी गई है जिसका चेक आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने परिवादी एच बी एस यादव को 19 नवंबर को सौंप दी गई ।
परिवादी के केस की प्रभावी पैरवी अधिवक्ता पुष्पेंद्र कुमार शर्मा द्वारा की गई ।
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