2012 के डकैती मुकदमे में कोर्ट के आदेश की अवहेलना
आगरा:
आगरा के ताजगंज थाने में वर्ष 2012 में दर्ज एक पुराने डकैती और अन्य धाराओं के मुकदमे में गवाही के लिए उपस्थित न होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-12 (ADJ-12) माननीय महेंद्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने वर्तमान में थाना पटियाली (जनपद कासगंज) में तैनात तत्कालीन विवेचक/निरीक्षक लोकेश भाटी के विरुद्ध प्रतिकूल आदेश पारित करते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कासगंज से स्पष्टीकरण तलब किया है।
क्या है पूरा मामला ?
मामला वर्ष 2012 का है, जब थाना ताजगंज में डकैती एवं अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन विवेचक लोकेश भाटी ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपी जितेंद्र, राजू, मुनेश, विजय उर्फ नेपाली, मंगल, सतेंद्र और मनोज के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
गवाही के चरण में, वर्तमान में थाना पटियाली के थानाध्यक्ष लोकेश भाटी को साक्ष्य देने के लिए अदालत में कई बार तलब किया गया।

* उनके विरुद्ध गैर-जमानतीय वारंट जारी किया गया।
* नोटिस भेजा गया।
* उन्हें व्यक्तिगत मोबाइल पर भी सूचित किया गया।
इन सभी प्रयासों के बावजूद, थानाध्यक्ष लोकेश भाटी गवाही देने के लिए अदालत में हाजिर नहीं हुए।
थानाध्यक्ष का दावा और कोर्ट की आपत्ति:
अदालत में पेश न होने पर थानाध्यक्ष लोकेश भाटी ने कहा कि पुलिस अधीक्षक कासगंज द्वारा उन्हें अदालत में हाजिर होने की अनुमति प्रदान नहीं की जा रही है, जिस कारण वह उपस्थित होने में असमर्थ हैं।
एडीजे-12 माननीय महेंद्र कुमार ने अपने आदेश में इसे अत्यंत आपत्तिजनक माना। उन्होंने कहा कि जनपद के शीर्ष पुलिस अधिकारी द्वारा न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित न किया जाना गंभीर है।
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न्यायालय का कड़ा निर्देश:
एडीजे-12 ने पुलिस अधीक्षक कासगंज को निर्देश दिया है कि वे अभियोजन साक्षी/विवेचक/निरीक्षक लोकेश भाटी को कार्यमुक्त कर, उनकी साक्ष्य अंकित कराने हेतु 10 नवंबर 2025 को अदालत में उपस्थित कराना सुनिश्चित करें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो उक्त दिनांक पर पुलिस अधीक्षक कासगंज स्वयं हाजिर होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
अदालत ने इस आदेश की एक-एक प्रति प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, एवं महानिदेशक अभियोजन उत्तर प्रदेश को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित करने का आदेश दिया है।
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