आगरा।
एक महत्वपूर्ण फैसले में, अदालत ने पत्नी द्वारा दायर भरण पोषण (गुज़ारा भत्ता) वाद को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि पत्नी स्वयं आयकर दाता है और अपना भरण पोषण करने में पूरी तरह समर्थ है, इसलिए उसे पति से कोई राहत नहीं मिलेगी।
मामला और पति का पक्ष:
कमला नगर निवासी एक महिला की शादी 21 अक्टूबर 2007 को नेहरू नगर (थाना हरीपर्वत) निवासी एक व्यक्ति से हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी, और उनके संसर्ग से दो पुत्रियों का जन्म हुआ।
विवाद के कारण पति-पत्नी अलग रहने लगे, लेकिन दोनों पुत्रियां पति के पास ही रहीं।
* बच्चों का दायित्व: पति ने अपनी दोनों पुत्रियों को शहर के एक नामचीन और अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाकर उनकी शिक्षा और भरण पोषण की जिम्मेदारी पूरी की।
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* पत्नी की आय: पत्नी द्वारा पति के विरुद्ध भरण पोषण वाद दायर करने पर, पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेन्द्र पाल सिंह और सुमित कुमार ने पक्ष रखा।
फैसले का आधार:
अदालत ने पति के पक्ष को सुनने के बाद यह पाया कि पत्नी स्वयं आयकर दाता (Income Tax Payer) है और अपना भरण पोषण करने में पूरी तरह सक्षम है।
इन तथ्यों के आधार पर, अदालत ने पत्नी द्वारा दायर वाद को निरस्त कर दिया और उसे गुज़ारा भत्ता दिलवाने से इंकार करते हुए कोई राहत नहीं दी।
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