आगरा:
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व एमएलसी विवेक बंसल और पूर्व विधायक प्रदीप माथुर को फतेहपुर सीकरी में 2020 में दर्ज एक मामले में सत्र न्यायालय से भी बड़ी राहत मिली है।
अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे-19) माननीय लोकेश कुमार ने अधीनस्थ न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था।
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क्या था मामला ?
यह मामला 19 मई 2020 को फतेहपुर सीकरी थाने में दर्ज किया गया था। तत्कालीन उप-निरीक्षक जितेंद्र कुमार गौतम ने इन नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी ) की धारा 188 (लोक सेवक के कानूनी आदेश की अवज्ञा), 269 (ऐसा कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलने की संभावना हो), और महामारी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। यह आरोप था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश में जबरन बसों को प्रवेश कराने की कोशिश की थी।
अधीनस्थ न्यायालय ने किया था बरी:
इस मामले में, विशेष मजिस्ट्रेट एम.पी./एम.एल.ए. कोर्ट ने 24 अप्रैल 2023 को साक्ष्य के अभाव में तीनों नेताओं को बरी कर दिया था। इसके बाद, अभियोजन पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।

सत्र न्यायालय ने खारिज की अपील:
हाल ही में हुई सुनवाई में, एडीजे-19 ने सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। कांग्रेस नेताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता रमा शंकर शर्मा और अन्य वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद, न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को सही ठहराया।
इस निर्णय से तीनों नेताओं को कानूनी रूप से बड़ी राहत मिली है।
यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा।
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