अगर आपकी जन्मकुंडली में बृहस्पति, शनि, मंगल, बुध और राहु है शुभ भाव में सशक्त तो आप बन सकते है सफल वकील और न्यायाधीश: ज्योतिषी पंडित प्रमोद गौतम

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बृहस्पति कानून का लेखक,शनि न्याय ,मंगल और बुध तार्किक विश्लेषण और राहु है मायावी ग्रह

आगरा 15 सितंबर।

किसी न्यायाधीश के एक आदेश से जब देश की दशा और दिशा निर्धारित हो या जब किसी अधिवक्ता के ठोस तर्कों से किसी के साथ हुआअन्याय न्याय में बदल जाता है तो मन में यह प्रश्न आना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे सफल न्यायिक व्यक्तियों को ब्रह्मांड के किन ग्रहों का आशीर्वाद मिला है ? जिससे वह इस मुकाम पर पहुंच पाए । इन सभी ज्योतिषीय शंकाओं के समाधान के लिए “कानून आज तक” ने वैदिक सूत्रम चेयरमैन एवम “द टाइम्स ऑफ एस्ट्रोलॉजी” के संस्थापक एवम प्रधान संपादक एस्ट्रोलॉजर पं प्रमोद गौतम से विस्तृत बातचीत की

पंडित गौतम ने बताया कि कानून के क्षेत्र में एक सफल बनने के लिए जन्मकुंडली में कौन से ग्रह सबसे ज्यादा प्रभावी होते हैं ? इस सन्दर्भ में जन्मकुंडली में गहराई से विवेचन करने की जरूरत होती है। वैदिक हिन्दू फलित ज्योतिष में ब्रह्मांड के अति शुभ ग्रह बृहस्पति को कानून का लेखक और शनि को कानून का क्रियान्वयन-कर्ता माना जाता है। कुल मिलाकर बृहस्पति कानून का कारक ग्रह है और ब्रह्मांड का न्यायाधीश शनि न्याय का ग्रह है। बुध ग्रह वाणी और बुद्धि का ग्रह है।

मंगल ग्रह साहस और मुकदमे बाजी का ग्रह है। न्यायिक व्यक्तियों को वास्तविक सच को सामने लाने के लिए अत्यधिक साहसी होना चाहिए। न्याय सेवा में सफलता के लिए राहु ग्रह की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कई बार अधिवक्ता अपने मुवक्किल के पक्ष में केस जीतने के लिए कूटनीतिक चालों और तर्कों का सहारा लेते हैं। मायावी छाया ग्रह राहु इन्ही विशेषताओं का कारक है। इसलिए सफल अधिवक्ता बनने के लिए, जन्मकुंडली में बृहस्पति, शनि, मंगल, बुध और राहु शुभ भावों में स्थित होकर मजबूत होने चाहिए। इन ग्रहों का अच्छा संयोजन एक सफल अधिवक्ता बनाता है।

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एस्ट्रोलॉजर पंडित गौतम ने बताया देवगुरु बृहस्पति ग्रह कानून के पेशे का कारक है और जन्मकुंडली में हर दूसरा ग्रह सकारात्मक रूप से देवगुरु बृहस्पति का समर्थन कर सकता है। जन्मकुंडली में ब्रह्मांड का न्यायाधीश शनि ग्रह बृहस्पति को संतुलन और निष्पक्षता प्रदान करता है, अन्यथा बृहस्पति नैतिकता और नियमों से बहुत दूर जा सकता है। मंगल तार्किक सोच देता है। जन्मकुंडली में बृहस्पति को मजबूत मंगल का समर्थन मिलने से कुछ लोग कानून की किताबें पढ़े बिना या कानून की किताबों के किसी भी अनुच्छेद को लागू किए बिना ही जोरदार तरीके से मामलों पर बहस कर सकते हैं। शासन का कारक सूर्य निर्णय और कार्यान्वयन की अंतिमता का अधिकार देता है।

बुध ग्रह सोचने, तर्क करने, विश्लेषण करने आदि में सहायता देता है। शुक्र ग्रह बृहस्पति की किसी भी कठोरता या अहंकार को कूटनीति प्रदान करता है। मन का कारक चन्द्रमा ग्रह बृहस्पति को सहानुभूति और भावनाएं प्रदान करता है। मायावी छाया ग्रह राहु बड़ी संख्या में ग्राहक और सार्वजनिक भागीदारी देता है। छाया ग्रह केतु न्यायिक प्रक्रियाओं में चतुराई और तीव्रता प्रदान करता है। कुल मिलाकर उपरोक्त सभी ग्रह जन्मकुंडली के शुभ भावों में स्थित हों तो ऐसे व्यक्ति उच्च न्यायालय एवम सर्वोच्च न्यायालय में सफल और प्रसिद्ध वकील बनाते हैं।

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यदि किसी सफल वकील की जन्मकुंडली में देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में, मंगल अपनी उच्च राशि मकर, शनि अपनी उच्च राशि तुला में जन्मकुंडली के शुभ भावों में विशेषकर प्रथम, चतुर्थ एवम दशम स्थान में और जन्मकुंडली के शुभ भावों में स्थित उपरोक्त उच्च ग्रहों की महादशा अवधि जीवन में आने वाली हो तो ऐसा वकील उच्च न्यायालय एवम सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के उच्च पद पर भी इन ग्रहों की कृपा से विराजमान हो जाता है।

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विवेक कुमार जैन
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