आगरा।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट 8 (एसीजेएम-8) माननीय कन्हैया जी की अदालत ने थाना एत्माद्दौला पुलिस की मनमानी और न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाया है।
वादिया के प्रार्थना पत्र पर अदालत द्वारा दो बार अग्रिम विवेचना के आदेश दिए जाने के बावजूद पुलिस द्वारा एक ही आरोप पत्र बार-बार पेश करने पर न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जेठ को भी तलब किया है।
इसके साथ ही, अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस की कार्रवाई थाना एत्माद्दौला में दर्ज मामले के अनुसार, एक महिला ने वर्ष 2023 में अपने ससुरालीजनों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न, मारपीट, जानलेवा हमला और अश्लील छेड़छाड़ के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
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मामले के तत्कालीन विवेचक ने जांच के दौरान जानलेवा हमला और छेड़छाड़ की धाराएं हटा दीं। साथ ही, जेठ और अन्य आरोपियों के नाम निकालते हुए केवल पति हरेंद्र पाल सिंह, सास गुड्डी देवी और ससुर महिपाल सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और डीपी एक्ट के तहत आरोप पत्र अदालत में प्रेषित कर दिया।
न्यायालय के आदेशों की अनदेखी पुलिस की इस कार्रवाई से असंतुष्ट वादिया ने अपने अधिवक्ता राजकुमार कुशवाह के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अग्रिम विवेचना (आगे की जांच) कराने का आग्रह किया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 अगस्त 2024 को अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। लेकिन तत्कालीन विवेचक ने पूर्व में दाखिल आरोप पत्र को ही सही ठहराते हुए उसे वापस अदालत में भेज दिया।
वादिया ने दोबारा अदालत से गुहार लगाई, जिस पर न्यायालय ने 5 मार्च 2025 को एक बार फिर एत्माद्दौला पुलिस को अग्रिम विवेचना के सख्त निर्देश दिए।
इसके बावजूद पुलिस ने मनमानी करते हुए बिना किसी फेरबदल के वही पुराना आरोप पत्र तीसरी बार अदालत में पेश कर दिया।
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अदालत का फैसला और सख्त कार्रवाई पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए एसीजेएम-8 माननीय कन्हैया जी ने सख्त कदम उठाया।
अदालत ने पूर्व में आरोपित पति, सास और ससुर के अतिरिक्त अब वादिया के जेठ धीरेंद्र के विरुद्ध अश्लील हरकत की धारा में स्वतः संज्ञान लिया है।
न्यायालय ने जेठ धीरेंद्र को 14 अक्टूबर 2026 के लिए समन जारी करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, अदालत ने जानलेवा हमले (हत्या के प्रयास) के बाबत पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उस धारा में संज्ञान नहीं लिया।
बार-बार न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने और विवेचना में लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) को विशेष रूप से निर्देशित किया है।
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