आगरा: १९ जून ।
राजामंडी चौराहे को अकारण बंद करने के मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर को जांच के आदेश दिए हैं। उन्हें 1 जुलाई 2025 तक अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
यह मामला थानाध्यक्ष लोहामंडी और एक एसआई के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी ) की धारा 133 के तहत दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें नागरिकों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया था।
मामले के अनुसार, ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव, अधिवक्ता गिरधारी लाल चौरसिया ने 5 दिसंबर 2021 को आरोप लगाया था कि जब वह दवा लेने लेडी लॉयल अस्पताल के सामने जा रहे थे, तो राजामंडी चौराहे पर बाजार की ओर आने वाले रास्ते को बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया था।
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इसे अपने नागरिक अधिकारों का हनन मानते हुए, उन्होंने तत्कालीन थानाध्यक्ष लोहामंडी देवेंद्र सिंह पांडेय और एसआई हेमंत मावी को पक्षकार बनाते हुए 13 अप्रैल 2022 को अदालत में एक शिकायत दर्ज की थी।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि लोहामंडी पुलिस को तत्काल एमजी रोड स्थित राजामंडी चौराहे से अवरोध हटाकर आम लोगों की सुविधा के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया जाए।
हालांकि, गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के राजामंडी बाजार स्थित नाथ संप्रदाय के प्राचीन दरिया नाथ मंदिर आगमन पर प्रशासन द्वारा चौराहे से बैरिकेडिंग हटा दी गई थी और तब से यह चौराहा खुला हुआ है।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में एसडीएम सदर को जांच कर 1 जुलाई 2025 तक अदालत में रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 1 जुलाई को तय की गई है।
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