आगरा/बरेली।
न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने और बार-बार बुलाने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर एक पुलिस अधिकारी को भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है।
आगरा की विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट (POCSO Act) माननीय सोनिका चौधरी ने निरीक्षक प्रदीप कुमार चतुर्वेदी का वेतन अगले आदेश तक रोकने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला आगरा के थाना जगदीशपुरा से संबंधित ‘राज्य बनाम योगेश आदि’ का है, जो पिछले पांच वर्षों से लंबित है। इस मुकदमे में आरोपियों पर घर में घुसकर अश्लील हरकत करने और पाक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में आरोप तय हैं।
* मामले में विवेचक (Investigating Officer) के अलावा अन्य सभी गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।
* विवेचक प्रदीप कुमार चतुर्वेदी, जो वर्तमान में जनपद बरेली की A.S.T.U. (ए.एस.टी.यू.) शाखा में प्रभारी निरीक्षक के रूप में तैनात हैं, गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश:
अदालत ने पाया कि विवेचक के विरुद्ध पूर्व में कई प्रतिकूल आदेश पारित किए गए और सम्मन जारी किए गए, इसके बावजूद उन्होंने अदालत में हाजिर होकर साक्ष्य अंकित कराना उचित नहीं समझा। उनकी अनुपस्थिति के कारण एक गंभीर मामला पिछले पांच साल से लटका हुआ है।
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विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बरेली को आदेशित किया है कि:
* निरीक्षक प्रदीप कुमार चतुर्वेदी का वेतन तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक रोक दिया जाए।
* एसएसपी बरेली व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें कि आगामी नियत तिथि पर विवेचक अनिवार्य रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपनी गवाही दर्ज कराएं।
मुख्य तथ्य:
* अधिकारी का नाम: प्रदीप कुमार चतुर्वेदी (प्रभारी निरीक्षक, ए.एस.टी.यू. बरेली)।
* संबंधित थाना: जगदीशपुरा, आगरा।
* अदालत: विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, आगरा।
* कारण: 5 साल पुराने पाक्सो एक्ट के मुकदमे में गवाही हेतु अनुपस्थित रहना।
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