आगरा।
सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत नकली टाटा नमक बेचने के आरोपी दुकानदार जगन्नाथ प्रसाद को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
एडीजे प्रथम माननीय पुष्कर उपाध्याय की अदालत ने मामले की गंभीरता और तथ्यों को देखते हुए आरोपी का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
मुंबई से आए टाटा कंपनी के अधिकृत अधिकारी अजय कुमार ने पुलिस को सूचना दी थी कि सिकंदरा क्षेत्र में टाटा ब्रांड के नाम पर नकली नमक बेचा जा रहा है।
इस सूचना पर पुलिस और कंपनी के अधिकारियों ने ‘अशोक प्रोविजन स्टोर’ पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, दुकान से एक-एक किलो के 60 पैकेट नकली टाटा नमक बरामद किए गए थे। इसके अलावा क्षेत्र की दो अन्य दुकानों से भी 58 पैकेट बरामद हुए थे।

कॉपीराइट एक्ट के तहत दर्ज हुआ था मुकदमा
छापेमारी के बाद दुकान मालिक जगन्नाथ प्रसाद (निवासी ग्राम दहतोरा) के विरुद्ध कॉपीराइट एक्ट की धारा 63 और 65 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी।
जमानत मिलने का मुख्य आधार:
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है।
अदालत ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए पाया कि पुलिस द्वारा प्रतिष्ठान से की गई कथित बरामदगी का कोई भी स्वतंत्र गवाह (Independent Witness) मौजूद नहीं था।
इस कारण साक्ष्यों की कमी और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को राहत प्रदान की और एडीजे प्रथम माननीय पुष्कर उपाध्याय ने अधिवक्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए जगन्नाथ प्रसाद की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
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