गलत रंग का लहंगा भेजना और रिफंड न देना ‘सेवा में कमी’, आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम ने कलकत्ता के शोरूम पर लगाया जुर्माना

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कोलकाता स्थित एक साड़ी शोरूम को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी पाया है।

आयोग ने शोरूम मालकिन को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को लहंगे की पूरी कीमत 6% ब्याज के साथ वापस करे और मानसिक क्षतिपूर्ति भी अदा करे।

क्या था मामला ?

आगरा की रहने वाली श्रीमती रितुल जैन (परिवादिनी) ने अपनी बेटी की शादी के लिए कोलकाता स्थित ‘तुभ्यम साड़ी शोरूम’ से 04 नवंबर 2023 को ₹2,50,000/- मूल्य का एक ‘मूव मनीष’ (पिंक पर्पल) लहंगा और अन्य कपड़े खरीदे थे।

शोरूम ने 05 जनवरी 2024 तक डिलीवरी का वादा किया था, लेकिन पार्सल 31 जनवरी को प्राप्त हुआ।

हैरानी की बात यह थी कि पार्सल में वह लहंगा नहीं था जिसे ऑर्डर किया गया था; उसके स्थान पर ‘सैम्पेन गोल्डन ब्राउन’ रंग का लहंगा भेजा गया था, जो शादी के उत्सव के लिए अनुपयुक्त था।

शोरूम के आश्वासन पर परिवादिनी ने वह लहंगा कोरियर के माध्यम से वापस भेज दिया, जो शोरूम को 13 फरवरी 2024 को प्राप्त हो गया, लेकिन इसके बावजूद शोरूम ने न तो सही लहंगा भेजा और न ही ₹2,50,000/- वापस किए।

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आयोग का निष्कर्ष:

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि:

* उपभोक्ता की श्रेणी: परिवादिनी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(7) के तहत एक ‘उपभोक्ता’ है।

* सेवा में कमी: नमूने के अनुसार उत्पाद न भेजना और वापस मिलने के बाद भी धनराशि न लौटाना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार है।

* विपक्ष का तर्क खारिज: शोरूम का यह दावा कि उन्हें लहंगा वापस नहीं मिला और वह फरीदकोट (पंजाब) चला गया, आयोग ने साक्ष्यों और कोरियर रसीदों के आधार पर खारिज कर दिया।

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आयोग का आदेश:

आयोग ने प्रतिपक्षी संख्या 01 (अनुश्री जैन, प्रोपराइटर तुभ्यम साड़ी शोरूम) को निम्नलिखित आदेश दिए हैं:

* रिफंड: लहंगे की कीमत ₹2,50,000/- परिवाद दाखिल करने की तिथि (06.08.2024) से वास्तविक भुगतान तक 06% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस की जाए।

* क्षतिपूर्ति: मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए ₹10,000/- की क्षतिपूर्ति राशि।

* वाद व्यय: कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹5,000/- का भुगतान।

* विशेष निर्देश: यदि शोरूम 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो ब्याज की दर 06% से बढ़ाकर 09% वार्षिक कर दी जाएगी।

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विवेक कुमार जैन
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