आगरा।
अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय सं०-1, आगरा माननीय राजेंद्र प्रसाद की अदालत ने पुलिस अभिरक्षा से भागने के एक पुराने मामले में आरोपी लाला उर्फ असलम खाँ (पुत्र बुन्दू खाँ, निवासी नगला बिहारी, थाना चन्दपा, जिला हाथरस) की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया है।
मामला 17 साल पुराना:
यह मामला 11 अप्रैल, 2008 का है, जो थाना न्यू आगरा में मुकदमा अपराध संख्या 229/2008, धारा 223, 224 भा०दं०सं० के तहत दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी हेड कांस्टेबल हौराम सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ जिला जेल फिरोजाबाद से 6 बंदियों को दीवानी आगरा में पेशी के लिए लाए थे।
पेशी के बाद जब बंदी लाला उर्फ असलम खाँ और राकेश उर्फ लौहरे को गाड़ी पर लाया गया, तो वे गायब थे। उप निरीक्षक अमर पाल सिंह ने बताया कि जब लाला ने पानी माँगा, तो उन्होंने गाड़ी का पिछला दरवाजा खोलकर उसे पानी दिया। इसी दौरान, दोनों अभियुक्तों उनकी आँखों में पिसी लाल मिर्च डालकर पुलिस अभिरक्षा से भाग गए।
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इस घटना के बाद, लाला उर्फ असलम खाँ और राकेश उर्फ लौहरे के साथ-साथ पुलिस लापरवाही के लिए एस.आई. अमर पाल सिंह के विरुद्ध भी मुकदमा पंजीकृत किया गया था। लाला उर्फ असलम खाँ के विरुद्ध मफरूरी (फरार होने) में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
आरोपी का पक्ष:
आरोपी लाला उर्फ असलम खाँ की ओर से विद्वान अधिवक्ता संदीप एडवोकेट और रंजना एडवोकेट ने तर्क दिया कि प्रार्थी ने कोई अपराध नहीं किया है और उसे झूठा फंसाया गया है।
अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी पेशी पर आगरा आया था और पेशाब करने के दौरान रास्ता भटक गया, जिसके कारण वह वापस नहीं आ सका। यह उसका प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र है। अभियुक्त दिनांक 10 अक्टूबर, 2025 से जिला कारागार में निरूद्ध है।
अदालत का फैसला:
अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है और आरोपित अपराध में अधिकतम दो वर्ष के दण्ड का प्रावधान है। प्रकरण मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा परीक्षणीय है।

न्यायालय ने मामले के समस्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, प्रकरण के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, प्रार्थी/अभियुक्त लाला उर्फ असलम खाँ का जमानत प्रार्थना पत्र सशर्त स्वीकार कर लिया।
जमानत की शर्तें:
अभियुक्त को ₹50,000/- का व्यक्तिगत बन्धपत्र तथा समान धनराशि के दो प्रतिभू (जमानती) दाखिल करने पर रिहा किया जाएगा।
* अभियुक्त विचारण (ट्रायल) में सहयोग करेगा।
* अभियुक्त साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और साक्षियों को प्रभावित नहीं करेगा।
* अभियुक्त विचारण के दौरान न्यायालय के समक्ष नियमित रूप से उपस्थित रहेगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन शर्तों के उल्लंघन की दशा में संबंधित न्यायालय जमानत निरस्त करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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