दूसरों को परेशान करने के लिए दाखिल जनहित याचिका “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की याचिका खारिज

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा/प्रयागराज:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से निजी रंजिश साधने और अन्य खातेदारों को परेशान करने के प्रयास पर सख्त रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की एकलपीठ ने मैनपुरी के ग्राम जिंदपुर स्थित साझी जमीन (मिनजुमला प्लॉट) से अतिक्रमण हटाने की मांग वाली शिवम चौहान की याचिका को खारिज कर दिया है।

मामले का मुख्य विवाद: साझी जमीन और निजी हित

याचिकाकर्ता ने थाना दन्नाहार, जिला मैनपुरी के प्लॉट संख्या 2666 (क्षेत्रफल 20.145 हेक्टेयर) पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए विपक्षियों को बेदखल करने की मांग की थी।

याची का तर्क था कि यह जमीन पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित है, जिस पर अवैध कब्जा किया गया है।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और निष्कर्ष:

सुनवाई के दौरान विपक्षी अधिवक्ता विनय कुमार मिश्र और राज्य सरकार के हलफनामे से निम्नलिखित तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर कोर्ट ने याचिका को खारिज किया:

* निजी रंजिश: कोर्ट ने पाया कि विवादित प्लॉट एक संयुक्त (मिनजुमला) जमीन है जिसमें कुल 18 खातेदार हैं। राजस्व संहिता की धारा 30 के तहत जमीन के बंटवारे का प्रावधान है, जिसे अपनाए बिना सीधे बेदखली की मांग करना गलत है।

* याची का आचरण: याचिकाकर्ता के पिता के खिलाफ भी इसी जमीन को लेकर धारा 67 के तहत कार्यवाही चल रही है। खुद के परिवार पर कार्यवाही होने के बावजूद दूसरों के खिलाफ PIL दाखिल करना दुर्भावनापूर्ण माना गया।

* अधिकार और कब्जा: विपक्षी अजय कुमार उर्फ मिंटू का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और अन्य विपक्षियों के मकान आबादी की जमीन पर बने हुए हैं।

“साझी जमीन के मामले में अन्य खातेदारों की बेदखली के लिए जनहित याचिका दायर करना कानूनी प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है। ऐसी याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।” — हाई कोर्ट

कुर्की आदेश विखंडित, DM को कारण बताओ नोटिस:

इससे पूर्व, कोर्ट ने निर्माण कार्य कुर्क करने का अंतरिम आदेश दिया था।

हालांकि, वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने पर कोर्ट ने:

* अजय कुमार के घर को कुर्क करने के आदेश को विखंडित कर दिया और घर वापस करने का निर्देश दिया।

* निषेधाज्ञा के बावजूद निर्माण होने देने पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी (DM) मैनपुरी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए ?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका केवल सार्वजनिक हित के लिए है, व्यक्तिगत लाभ या निजी विवादों को निपटाने का हथियार नहीं।

चूंकि मकान रिहायशी जमीन पर थे, इसलिए उन्हें कुर्क करना अनुचित था।

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मनीष वर्मा
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