मुरादाबाद में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ याचिका

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां
नगर निगम व लोक निर्माण विभाग ने कहा जमीन व कार्रवाई उसकी नहीं
कोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा हलफनामा

आगरा / प्रयागराज 13 सितंबर ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अजीबो-गरीब मामला आया जहां, नगर निगम मुरादाबाद के ध्वस्तीकरण अभियान के खिलाफ चुनौती याचिका दाखिल की गई।

कोर्ट के पूछने पर‌ नगर निगम मुरादाबाद ने बताया कि जमीन उसकी नहीं लोक निर्माण विभाग की है। उसी ने चिन्हांकित किया है। जब कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से पूछा तो बताया कि जमीन उसके विभाग की भी नहीं है और न ही उसने चिन्हांकन किया है।

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जमीन सीलिंग विभाग की है। जबकि नगर निगम की टीम ने मौके की पैमाइश की और याची के मकान का एक फीट 15 सेंटीमीटर के अतिक्रमण का चिन्हांकन कर स्वयं हटा लेने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट ने दोनों विभागों के अधिकारियों से तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है और याचिका को सुनवाई के लिए पांच हफ्ते बाद पेश करने का आदेश दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने राम औतार की याचिका पर अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी को सुनकर दिया है।

याची अधिवक्ता का कहना था कि याची ने 1984 मे दो दूकाने व घर का निर्माण किया। 1995-96 मे गांव नगर निगम मुरादाबाद के क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। इस समय तक किसी ने अतिक्रमण की शिकायत नहीं की।

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जुलाई 24 मे अधिकारियों की टीम पहुंची और नाप-जोख शुरू कर दिया। घरों में निशान लगाकर अतिक्रमण हटा लेने का आदेश दिया।

अखबार में खबर छपी कि 30 जुलाई से ध्वस्तीकरण अभियान में अतिक्रमण हटाया जायेगा। जिसपर यह याचिका दायर की गई।

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मनीष वर्मा
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