कर्तव्य में लापरवाही: दरोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश

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आगरा:

अदालत के आदेशों की अनदेखी करने पर आगरा की एक अदालत ने थाना हरीपर्वत में तैनात सब-इंस्पेक्टर सूर्य नारायण मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

अपर जिला न्यायाधीश-13 माननीय महेश चंद वर्मा ने पुलिस अधिनियम की धारा 23/29 के तहत उनके खिलाफ परिवाद (शिकायत) दर्ज करने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले में गवाह दरोगा को अदालत में पेश करने में लापरवाही बरतने के कारण की गई है।

क्या है पूरा मामला ?

अपर जिला न्यायाधीश-13 की अदालत में ‘राज्य बनाम ललितेश बघेल एवं अन्य’ का एक मामला चल रहा है। इस मामले में दरोगा संजीव कुमार तोमर को गवाही देनी थी।

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अदालत ने कई बार उन्हें पेश होने के आदेश दिए, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी किए और थानाध्यक्ष हरीपर्वत को इन्हें तामील (जारी) कराने का निर्देश दिया।

हालांकि, इन आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी मिलने पर दरोगा सूर्य नारायण मिश्रा ने अदालत को बताया कि सरकारी काम और ‘जनकपुरी आयोजन’ में व्यस्तता के कारण वह वारंट की तामील नहीं करा पाए। उन्होंने मामले की अगली तारीख देने का अनुरोध किया।

अदालत का सख्त रुख:

दरोगा की इस रिपोर्ट को देखने के बाद न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि दरोगा की आख्या से साफ है कि वह अदालत के काम को सरकारी काम नहीं मानते और उसे महत्वहीन समझते हैं।

न्यायाधीश ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश में भी न्यायिक आदेशों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुकदमे का जल्द निस्तारण होना अभियुक्त का मूलभूत अधिकार है।

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इस गंभीर लापरवाही के चलते अपर जिला न्यायाधीश-13 ने दरोगा सूर्य नारायण मिश्रा के खिलाफ पुलिस अधिनियम की धारा 23/29 के तहत परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया।

इसके साथ ही, अदालत ने थानाध्यक्ष हरीपर्वत को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह दरोगा संजीव कुमार तोमर पर गैर-जमानती वारंट और नोटिस की तामील सुनिश्चित करें और उन्हें 7 अक्टूबर को गवाही के लिए अदालत में पेश करें।

यदि वह ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो थानाध्यक्ष को खुद अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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