बीमा क्लेम पर राज्य उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला: मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज के पक्ष में निर्णय रहा बरकरार

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां
उपभोक्ता प्रतितोष आयोग प्रथम ने दिया था ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज के पक्ष में कुल ₹10,02,846/- की राशि दिलवाने का आदेश

लखनऊ/आगरा:

उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लखनऊ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (Oriental Insurance Co. Ltd.) की अपील को खारिज करते हुए आगरा जिला उपभोक्ता फोरम-I के उस निर्णय को पुष्टि दे दी है जिसमें मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज (M/s Marsons Electrical Industries) के बीमा दावे को स्वीकार किया गया था।

मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज, जो ट्रांसफार्मर बनाने और सीआरजीओ इलेक्ट्रिकल स्टील शीट के आयात-निर्यात का कारोबार करती है, ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से समुद्री बीमा पॉलिसी ली थी। यह विवाद कंपनी द्वारा आयात किए गए माल में क्षति को लेकर था।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

* परिवादी (Complainant): मैसर्स मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज, आगरा।

* विपक्षी (Opposite Party): दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लि., लखनऊ/आगरा।

* शिकायत का आधार: कंपनी ने 14.04.2006 को एक विशिष्ट समुद्री बीमा पॉलिसी के लिए आवेदन किया, जिसके तहत CRGO Electrical Steel Sheet का बीमा किया गया था। माल रूस से चला था और इसे मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह से सड़क मार्ग से बानमोर, जिला मुरैना (म.प्र.) ले जाया जाना था।

* क्षति और दावा: बानमोर पहुंचने पर ₹1,899,500/- का माल क्षतिग्रस्त पाया गया और 16.08.2006 को ₹10,76,636/- में से ₹2,00,790/- सेल्वेज घटाते हुए ₹8,75,846/- का दावा बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

* दावा अस्वीकृति (Repudiation): बीमा कंपनी ने 09.03.2007 और 12.03.2007 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने यात्रा शुरू होने के 15 दिन बाद पॉलिसी ली थी, और यह बीमा शर्तों का उल्लंघन है। साथ ही, कंपनी ने माल पहुंचने के 72 घंटे के भीतर सूचित न करने पर भी आपत्ति जताई थी (माल 29.05.06 को पहुंचा, सूचना 09.06.06 को दी गई)।

जिला फोरम और राज्य आयोग का निर्णय:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम-I, आगरा ने शिकायत संख्या 116/2008 में 11.09.2014 को मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल ₹10,02,846/- की राशि दिलवाने का आदेश दिया था, जिसमें निम्नलिखित शामिल थे:

* बीमा राशि: ₹8,75,846/-

* व्यापार की क्षति: ₹1,00,000/-

* मानसिक कष्ट: ₹25,000/-

* पत्रचार और मुकदमा खर्च: ₹2,000/-

इसके अतिरिक्त, यह भी आदेश दिया गया कि ₹10,02,846/- की इस राशि पर परिवाद दाखिल करने की तिथि (14.03.2008) से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज का भुगतान भी किया जाएगा।

राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लखनऊ ने इस निर्णय को सही ठहराया। माननीय सदस्यों, राजेंद्र सिंह (पीठासीन सदस्य) और विकास सक्सेना ने 10 जनवरी 2024 को सुनाए गए अपने फैसले में निम्नलिखित मुख्य बिंदु रखे:

* उपभोक्ता का दर्जा: परिवादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत नजीर को स्वीकार करते हुए यह माना गया कि यदि बीमा माल की सुरक्षा और व्यापारिक जोखिम के लिए लिया गया है, तो भी परिवादी उपभोक्ता माना जाएगा।

* पॉलिसी जारी करने की जिम्मेदारी: आयोग ने कहा कि जब बीमा कंपनी ने सभी तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद पॉलिसी जारी कर दी है, तो वह यह नहीं कह सकती कि बीमा यात्रा शुरू होने के 15 दिन बाद लिया गया था।

* बीमा कंपनी की देनदारी: चूंकि बीमा कंपनी ने समुद्री बीमा पॉलिसी जारी की थी, इसलिए वह पॉलिसी की शर्तों के अनुसार हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी है।जिसके परिणाम स्वरूप आयोग ने जिला फोरम के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया और अपील को लागत सहित खारिज कर दिया।

नवीनतम घटनाक्रम के अनुसार:

न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, आगरा अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार ने 08.04.2024 को एक आदेश जारी किया, जिसमें बताया गया कि बीमा कंपनी द्वारा जमा की गई ₹12,65,628/- की परिपक्वता धनराशि (FDR) मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज के बैंक खाते में जमा हो चुकी है।

इसके उपरांत डिक्री की बकाया धनराशि 8,55,893/- के संबंध में 29/10/25 को जारी आदेश के अनुसार उपरोक्त धनराशि का चेक उपभोक्ता प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार ने मैसर्स मारसन्स इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज, आगरा के विमलेश कुमार जैन को दिनांक 30/10/25 को प्रदान किया ।

इस अवसर पर सदस्य राजीव सिंह और डिक्रीधारी के अधिवक्ता जसमीत सिंह आहूजा भी उपस्थित रहे ।

Attachment/Order/Judgement – marsons

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विवेक कुमार जैन
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