राजा बलवंत सिंह कॉलेज विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ‘राजा’ के दोनों बेटे 5 साल के लिए बारी-बारी से संभालेंगे उपाध्यक्ष पद

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आगरा/प्रयागराज:

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आगरा के प्रतिष्ठित राजा बलवंत सिंह कॉलेज (Raja Balwant Singh’s College, Agra) का संचालन करने वाली बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के प्रबंधन समिति (Committee of Management) के वर्षों पुराने विवाद का निपटारा करते हुए 6 नवंबर, 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने चार संबंधित रिट याचिकाओं (WRIT-C No. 10388 of 2019 सहित) पर फैसला सुनाया।

विवाद का मुख्य बिंदु:

सोसाइटी के नियमों के अनुसार, राजा बलवंत सिंह कॉलेज के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष का पद राजा ऑफ अवागढ़ (Raja of Awagarh Estate) के लिए आरक्षित है।

यह विवाद स्वर्गीय राजा के वंशज परिवार के दो सदस्यों— श्री जितेंद्र पाल सिंह (ज्येष्ठ) और श्री अनिरुद्ध पाल सिंह (कनिष्ठ)—के बीच पद को लेकर था।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ:

* कोर्ट ने पाया कि परिवार के सदस्यों ने पिछली न्यायिक टिप्पणियों (2011 के डी.पी.एस. भाटी मामले) के बावजूद अपने विवादों को नहीं सुलझाया है।

* कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पारिवारिक झगड़े के कारण सोसाइटी के उद्देश्यों और उनके पुरखों की विरासत को नुकसान हो रहा है।

* सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष (जितेंद्र पाल सिंह और अनिरुद्ध पाल सिंह) कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन कोर्ट ने देखा कि उन्होंने केवल “शारीरिक हावभाव” के रूप में हाथ मिलाया और उनके बीच “कोई भावनात्मक बंधन” नहीं था।

कोर्ट का समाधान (ऐतिहासिक फैसला):

कोर्ट ने बोर्ड, परिवार और विरासत के हित में एक अनूठा समाधान प्रस्तावित किया:

* पद की साझेदारी: कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजा के दोनों भाई— जितेंद्र पाल सिंह और अनिरुद्ध पाल सिंह—अपनी जन्मतिथि के आधार पर 5 साल के कार्यकाल के लिए समान अवधि (ढाई-ढाई वर्ष) के लिए बोर्ड के सदस्य और उपाध्यक्ष का पद संभालेंगे।

* कार्यकाल का विभाजन: यह व्यवस्था 01 दिसंबर 2025 से लागू होगी।

* ज्येष्ठ भाई: जितेंद्र पाल सिंह पहले 2.5 साल के लिए सदस्य और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे।

* कनिष्ठ भाई: अनिरुद्ध पाल सिंह शेष 2.5 साल के लिए जिम्मेदारी संभालेंगे।

* पुरानी प्रथा की समाप्ति: कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि केवल सबसे बड़े बेटे (या पिछली पीढ़ी के सबसे बड़े बेटे के सबसे बड़े बेटे) को ही यह पद संभालने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अब जबकि कोई ‘राजा’ नहीं है, तो यह प्रथा जारी नहीं रह सकती।

* सद्भावना राशि जमा करने का निर्देश: दोनों पक्षों (जितेंद्र पाल सिंह और अनिरुद्ध पाल सिंह) को अपनी सद्भावना (bonafide) दिखाने के लिए दो-दो लाख रुपये बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है। यह राशि 01 जनवरी 2026 से पहले जमा करनी होगी।

* नए बोर्ड का गठन: बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के शेष सदस्यों के चुनाव/नियुक्ति की प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से शुरू की जाएगी और नई सूची संबंधित रजिस्ट्रार को 01 जनवरी 2026 से पहले भेजनी होगी।

इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने 2013 और 2016 की दो पुरानी रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, क्योंकि प्रबंधन समिति का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे अर्थहीन (infructuous) हो चुकी थीं।

Attachment/Order/Judgement – WRIC(A)_10388_2019 (2)

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विवेक कुमार जैन
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