आगरा: ९ जून ।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने एक महिला डॉक्टर द्वारा धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए दायर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि पीड़िता इस आदेश से संतुष्ट नहीं है, तो वह ऊपरी अदालत में अपील कर सकती है।
डॉ. दीपाली अग्रवाल, पत्नी राहुल अग्रवाल, निवासी विभव वेल्यू अपार्टमेंट, मयूर कॉम्प्लेक्स, थाना ताजगंज ने सीजेएम अदालत में दीपेश बोहरा पुत्र स्वर्गीय अनिल सिंह बोहरा के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश देने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया था।
डॉ. अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 17 जुलाई 2022 को दीपेश बोहरा के खिलाफ थाना ताजगंज में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत (विश्वास का उल्लंघन) के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि दीपेश बोहरा उनसे गहने बनवाने के नाम पर पैसे और पुराने गहने ले गया था।
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आरोपी के खिलाफ आगरा के साथ-साथ जयपुर में भी कई अन्य लोगों ने मुकदमे दर्ज कराए थे। थाना न्यू आगरा में दर्ज एक मामले में आरोपी को पकड़ा गया था और पुलिस ने उसके पास से डॉ. अग्रवाल और अन्य लोगों के गहने बरामद किए थे।
डॉ. अग्रवाल ने जब अपने गहने वापस लेने के लिए आवेदन किया, तो उन्हें पता चला कि आरोपी दीपेश बोहरा पहले ही जाली बिलों के आधार पर अपने हक में गहने छुड़वा चुका था।
सीजेएम ने डॉ. अग्रवाल के आवेदन पर सुनवाई करते हुए पाया कि विपक्षी ने अपनी पहचान छुपाकर कोई सामान अपने हक में नहीं छुड़वाया था। अदालत ने कहा कि सारा सामान न्यायालय द्वारा 5 दिसंबर 2023 को पारित आदेश के तहत जारी किया गया था।
सीजेएम ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि डॉ. अग्रवाल इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं, तो वह नियमानुसार अपीलीय न्यायालय में अपील दायर कर सकती हैं। अदालत की राय में मामला न बनने पर प्रार्थना पत्र खारिज करने का आदेश दिया गया।
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