दोषी पाए जाने के बावजूद दवा कंपनी के निदेशक को जेल नहीं, तीन साल की परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर किया रिहा

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा :

बीस साल पुराने एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद भी मैसर्स विठ्ठल फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड के 75 वर्षीय निदेशक मुरारी लाल गोयल को जेल नहीं भेजा गया।

अदालत ने उनकी उम्र और अस्वस्थता को देखते हुए उन्हें तीन साल की परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर रिहा कर दिया।

Also Read – बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर सिंह का आगरा दौरा 19 सितंबर को

क्या था मामला ?

यह मामला 1 फरवरी, 2005 का है। उस समय औषधि निरीक्षक श्रीमती राकेश कुमारी ने एक टीम के साथ लक्ष्मी मेडिकल स्टोर, नौलखा सदर बाजार पर छापा मारा था।

वहां से एस.बी.एम प्लस नामक दवा का सैंपल लिया गया था। लखनऊ के राजकीय जन विश्लेषक की जाँच रिपोर्ट में यह दवा मानक से कम पाई गई। इसके बाद मुरारी लाल गोयल के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया।

अदालत का फैसला:

लगभग 20 साल तक चली सुनवाई के बाद, विशेष न्यायाधीश (ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट) की अदालत ने निदेशक को दोषी पाया। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक एस.पी. सिन्हा के तर्कों और आरोपी की 75 वर्ष की उम्र और खराब स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने उन्हें सहानुभूतिपूर्ण तरीके से सिर्फ तीन साल की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया।

Also Read – कुल्हाड़ी से मामा की हत्या करने वाले भांजे को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना

अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि इस तीन साल की अवधि के दौरान आरोपी को अच्छे व्यवहार का पालन करना होगा और किसी भी अपराध में शामिल नहीं होना होगा।

साथ ही, जब भी अदालत उन्हें बुलाएगी, उन्हें हाजिर होना पड़ेगा। आरोपी को 20-20 हजार रुपये की दो जमानतें और उसी राशि का व्यक्तिगत बांड भी भरने का आदेश दिया गया है।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Channel BulletinGroup Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

2 thoughts on “दोषी पाए जाने के बावजूद दवा कंपनी के निदेशक को जेल नहीं, तीन साल की परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर किया रिहा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *