आगरा।
साढ़े सात लाख रुपये के चेक डिसऑनर (बाउंस) होने के मामले में आगरा की एक अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-7 (ACJM) माननीय अनुज कुमार ने कमला नगर स्थित ‘त्यागी इलेक्ट्रॉनिक्स’ के प्रोपराइटर जितेंद्र कुमार को मुकदमे के विचारण के लिए अदालत में तलब करने के आदेश जारी किए हैं।
जानिए क्या है पूरा विवाद ?
गोविंद पुरी एक्सटेंशन, ब्रज विहार (कमला नगर) निवासी प्रमोद यादव ने अपने अधिवक्ता शिव शंकर मुद्गल के माध्यम से अदालत में परिवाद दायर किया था।
मामले के विवरण के अनुसार:
* आरोपी जितेंद्र कुमार ने अपनी दुकान बेचने के लिए वादी प्रमोद यादव से 40 लाख रुपये में सौदा तय किया था।
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* इस सौदे के तहत, वादी ने 1 जुलाई 2024 को बतौर एडवांस (बयाना) 7 लाख 50 हजार रुपये आरोपी को दिए थे।
* समझौते के अनुसार, आरोपी को एक माह के भीतर दुकान का बैनामा (रजिस्ट्री) वादी के पक्ष में करना था।
चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई:
आरोप है कि बाद में विपक्षी जितेंद्र कुमार ने दुकान बेचने का सौदा निरस्त कर दिया। जब वादी प्रमोद यादव ने अपनी एडवांस राशि वापस मांगी, तो आरोपी ने उन्हें 7.50 लाख रुपये का चेक दिया। वादी ने जब यह चेक बैंक में लगाया, तो वह डिसऑनर (बाउंस) हो गया।
रकम वापस न मिलने पर वादी ने अदालत की शरण ली। अधिवक्ता के तर्कों और दस्तावेजों पर गौर करते हुए, अदालत ने आरोपी जितेंद्र कुमार को दोषी मानते हुए विचारण के लिए समन जारी कर तलब किया है।
मुख्य बिंदु:
* मामला: चेक बाउंस (धारा 138 NI Act)
* विवादित राशि: 7,50,000/- रुपये
* पक्ष: प्रमोद यादव (वादी) बनाम जितेंद्र कुमार (विपक्षी)
* अदालत: अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-7, आगरा
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