आगरा सीजेएम ने सिकंदरा थानाध्यक्ष को थमाये चार अलग अलग मामलों में कारण बताओ नोटिस
आगरा।
आगरा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पुलिस कार्यप्रणाली में शिथिलता और न्यायिक आदेशों की अवहेलना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम ) आगरा माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने थाना सिकंदरा के थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार त्रिपाठी को चार अलग-अलग मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 जनवरी 2026 तक स्पष्टीकरण मांगा है।
जवाब संतोषजनक न होने पर थानाध्यक्ष के विरुद्ध कारावास और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने जैसी गंभीर विधिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
न्यायालय द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:
* आत्मसमर्पण आवेदनों में देरी और उत्पीड़न: न्यायालय के संज्ञान में आया है कि थाने से आत्मसमर्पण (Surrender) प्रार्थना पत्रों पर समय से आख्या प्रस्तुत नहीं की जा रही है।
शिकायतें मिली हैं कि थानाध्यक्ष जानबूझकर देरी कर लोगों को परेशान कर रहे हैं और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। इस मामले में धारा 388 BNSS के तहत 7 दिन के कारावास की चेतावनी दी गई है।

* गंभीर मुकदमों में लापरवाही: हत्या जैसे गंभीर मामले (धारा 302/34 आईपीसी ) में वांछित अभियुक्त राजीव शर्मा के विरुद्ध नवंबर 2025 से जारी गैर-जमानती वारंट और धारा 82/83 सीआरपीसी की कार्यवाही की तामील नहीं की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि वह अभियुक्त अन्य न्यायालयों में उपस्थित हो रहा है, लेकिन सिकंदरा पुलिस उसे पकड़ने में विफल रही है।
* न्यायिक प्रक्रियाओं में व्यवधान: धारा 173(4) BNSS के तहत प्रार्थना पत्रों की आख्या कई तिथियों से लंबित है, जिससे न्यायिक निस्तारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
* भ्रष्टाचार और अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने का संदेह: न्यायालय ने पाया कि लंबे समय से जारी सम्मन, नोटिस और वारंट पर कोई रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है ।
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस इन आदेशों का निस्तारण अपने स्तर पर ही कर रही है और अभियुक्तों को अनुचित लाभ पहुंचा रही है। इस मामले में थानाध्यक्ष पर धारा 409 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी गई है।
न्यायालय ने सभी मामलों में थानाध्यक्ष सिकंदरा प्रदीप कुमार त्रिपाठी को 15.01.2026 तक अपनी आख्या प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।
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