आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की सेवा में कमी मानते हुए एक विधवा के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया है।
आयोग ने LIC को आदेश दिया है कि वह परिवादिनी को 3 लाख रुपये की बीमा राशि के साथ-साथ मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 30 हजार रुपये का भुगतान करे।
मामले की पृष्ठभूमि:
फतेहपुर सीकरी के ग्राम दूरा निवासी श्रीमती मीना ने अपने अधिवक्ता अमर सिंह के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले के अनुसार:
* उनके पति स्व. नवल सिंह ने 3 फरवरी 2022 को LIC की ‘टेबल 914’ के तहत 3 लाख रुपये की पॉलिसी ली थी।
* उन्होंने अर्धवार्षिक प्रीमियम के रूप में 8,262 रुपये का भुगतान किया था।
* पॉलिसी लेने के मात्र 6 दिन बाद यानी 14 फरवरी 2022 को नवल सिंह की आकस्मिक मृत्यु हो गई।

LIC ने क्यों खारिज किया था क्लेम ?
जब श्रीमती मीना ने LIC की संजय प्लेस शाखा में क्लेम दाखिल किया, तो निगम ने इसे ‘अर्ली क्लेम’ (Early Claim) की श्रेणी में डालते हुए खारिज कर दिया था।
बीमा कंपनी का तर्क था कि पॉलिसी शुरू होने के बेहद कम समय के भीतर मृत्यु होने के कारण वे भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
आयोग का सख्त फैसला:
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि क्लेम को महज ‘अर्ली क्लेम’ के आधार पर खारिज करना अनुचित है।
आयोग ने निम्नलिखित आदेश पारित किए:
* क्लेम राशि: LIC परिवादिनी को 3 लाख रुपये का भुगतान करे।
* ब्याज: यह राशि मुकदमा दायर करने की तिथि (14 फरवरी 2023) से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ देनी होगी।
* हर्जाना: मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च के रूप में 30 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
* समय सीमा: निगम को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा।
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