आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का बड़ा फैसला: वारंटी अवधि में खराब ई-स्कूटी न सुधारना पड़ा भारी, कंपनी को नई गाड़ी देने या पैसे वापस करने का दिया आदेश

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा ने उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता और डीलर को सेवा में कमी का दोषी पाया है।

आयोग ने विपक्षी गणों को आदेश दिया है कि वे परिवादिनी को नई बैटरी के साथ नया स्कूटर प्रदान करें या स्कूटर की पूरी कीमत ब्याज सहित वापस करें।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

आगरा की निवासी श्रीमती नेहा शर्मा ने 14 अप्रैल 2023 को ₹48,000/- में ‘कोमाकी एक्स-1’ मॉडल की एक इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी। वाहन पर बैटरी के लिए 3 वर्ष और मोटर/फ्रेम के लिए 1 वर्ष की वारंटी दी गई थी।

हालांकि, खरीद के तुरंत बाद ही स्कूटी की बैटरी, चार्जिंग और लाइटों में समस्याएं आने लगीं।

जब परिवादिनी शिकायत करने डीलर के पास पहुंचीं, तो पता चला कि शोरूम बंद हो चुका है। निर्माता कंपनी को ईमेल के माध्यम से दी गई शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि वाहन में मूल लिथियम-आयन बैटरी के स्थान पर कोई स्थानीय (लोकल) बैटरी लगा दी गई थी।

आयोग के समक्ष दलीलें:

* परिवादिनी: वारंटी अवधि के भीतर खराबी आने के बावजूद न तो वाहन ठीक किया गया और न ही बैटरी बदली गई।

* विपक्षी (डीलर व सर्विस सेंटर): डीलर ने तर्क दिया कि निर्माण दोष के लिए केवल निर्माता कंपनी जिम्मेदार है। वहीं, सर्विस सेंटर का दावा था कि स्कूटी एक बार ठीक करके संतोषजनक स्थिति में वापस कर दी गई थी।

आयोग का निष्कर्ष और आदेश:

माननीय अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार की पीठ ने पाया कि स्कूटी वारंटी अवधि के भीतर (लगभग 6 माह में) खराब हो गई थी और विपक्षी गणों ने इसे ठीक करने में लापरवाही बरती।

आयोग ने स्पष्ट किया कि ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ की धारा 84 और 86 के तहत निर्माता और विक्रेता दोनों ही दोषपूर्ण उत्पाद के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी हैं।

आयोग द्वारा जारी मुख्य निर्देश:

* नया वाहन: विपक्षी गण निर्णय के 45 दिनों के भीतर परिवादिनी को उसी मॉडल की नई स्कूटी (नई बैटरी सहित) उपलब्ध कराएं।

* विकल्प (धनराशि वापसी): यदि नया वाहन नहीं दिया जाता, तो स्कूटी की कीमत ₹48,000/- को खरीद की तारीख (14.04.2023) से 6% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करें।

* क्षतिपूर्ति: परिवादिनी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए ₹5,000/- और वाद व्यय के रूप में ₹5,000/- का भुगतान अलग से करना होगा।

* डिफ़ॉल्ट क्लॉज़: यदि नियत अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़कर 9% वार्षिक हो जाएगा ।

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विवेक कुमार जैन
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