आगरा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक (Stay) लगाए जाने के बावजूद एक महिला को हिरासत में लेकर अदालत में पेश करना विवेचक के लिए भारी पड़ गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-8) माननीय कन्हैया जी ने विवेचक की इस कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल महिला का रिमांड निरस्त कर उसे रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को संबंधित विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए।
क्या है पूरा मामला ?
मामला थाना एत्माद्दौला से संबंधित है, जहां मुकदमा अपराध संख्या 504/24 के तहत श्रीमती पूनम भटनागर के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 406 (धोखाधड़ी व जालसाजी) के अंतर्गत मामला दर्ज था।
इस मामले के विवेचक ने अभियुक्त पूनम भटनागर को हिरासत में लेकर न्यायिक अभिरक्षा के लिए अदालत में पेश किया था।
हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना:
सुनवाई के दौरान अभियुक्ता के अधिवक्ता अनिल प्रकाश रावत एवं प्रियंका रावत ने अदालत के समक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि:
* अभियुक्ता ने पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
* हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 फरवरी 2025 को उनकी गिरफ्तारी पर रोक (Stay) लगाने के आदेश पारित किए थे।
* इसके बावजूद, विवेचक ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की और महिला को अवैध रूप से हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया।
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अदालत का फैसला: रिमांड निरस्त, विवेचक पर गिरेगी गाज:
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए पुलिस की इस कार्रवाई को ‘पूर्णतया अवैध’ माना।
कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश जारी किए:
* रिमांड निरस्त: अदालत ने अभियुक्ता का न्यायिक रिमांड देने से इनकार कर दिया।
* रिहाई के आदेश: श्रीमती पूनम भटनागर को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए गए, साथ ही उन्हें विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया गया।
* पुलिस आयुक्त को निर्देश: अदालत ने इस मामले में विधिक मर्यादाओं के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त, आगरा को आदेश दिया कि वह आदेशों की अवहेलना करने वाले विवेचक के विरुद्ध सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करें।
कोर्ट की टिप्पणी: उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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