बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने वकील को दो वर्ष के लिए किया राज्य बार काउंसिल से निलंबित
यू पी बार कौंसिल का आदेश किया रद्द
उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को दिए पता लगाने के निर्देश कि अभय प्रताप सिंह [नामांकन संख्या UP07322/19] ने मनोज कुमार शर्मा या अभय प्रताप सिंह किस नाम से काउंसिल के समक्ष नामांकन के लिए किया था आवेदन
बीसीआई ने कहा कि यदि अभय प्रताप सिंह के द्वारा किसी छद्म नाम से वकील के रूप में नामांकन प्राप्त करने में कोई धोखाधड़ी या गलत बयानी की है, तो धोखाधड़ी और अधिनियम की धारा 26 (1) के तहत उत्तर प्रदेश बार काउंसिल करे कार्यवाही
फिरोजाबाद की अदालत ने धोखाधड़ी और छल के लिए दोषी ठहराते हुए सुनायी है आरोपी वकील को दो वर्ष के कारावास की सजा
आगरा/नई दिल्ली 13 नवंबर ।
फिरोजाबाद के एक वकील ने अजब ही कारनामा किया सम्पूर्ण पढ़ाई मनोज कुमार शर्मा के नाम से की और अभय प्रताप सिंह के छद्म नाम से वकालत शुरू कर दी ।
इसकी शिकायत कुलदीप कुमार द्वारा उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में की गई । बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने शिकायत का निपटारा करते हुए दिनांक 02/12/2022 को एक आदेश पारित करते हुए कुलदीप कुमार की शिकायत को न तो स्वीकार किया और ना ही उसको खारिज किया ।बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने कहा कि प्रतिवादी अभय प्रताप सिंह उर्फ मनोज कुमार शर्मा पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में एक एफआईआर संख्या 193/2015 में धारा 420, 465, 471, तहत मुकदमा चलाया जा रहा था।
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क्योंकि उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज के करियर में मनोज कुमार शर्मा नाम का इस्तेमाल किया था जबकि वे अभय प्रताप सिंह के नाम से वकील के रूप में प्रैक्टिस कर रहे थे।जिससे किसी और के नामांकन प्रमाण पत्र का दुरुपयोग हुआ।लेकिन बार काउंसिल ने प्रतिवादी को व्यावसायिक कदाचार का दोषी ठहराए बिना यह कह कर शिकायत का निपटारा कर दिया कि प्रतिवादी के विरुद्ध चल रहे आपराधिक मामले की अपील पर अभी निर्णय नहीं हुआ था।
राज्य काउंसिल के इस फैसले के विरुद्ध वादी कुलदीप कुमार ने आगरा के मूल निवासी युवा अधिवक्ता चेतन जादोन के माध्यम से बार काउंसिल आफ़ इंडिया में अपील दाखिल की ।
बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया की अनुशासन समिति के चेयरमैन: वेद प्रकाश शर्मा, एडवोकेट,सदस्य: ए. रामी रेड्डी, एडवोकेट, सदस्य: डी.के. सिंह, एडवोकेट के समक्ष कुलदीप कुमार के अधिवक्ता चेतन जादोन ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया कि अभय प्रताप सिंह पर पहले से ही धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप थे, जिनके लिए उन्हें फिरोजाबाद अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई गई है और उनकी अपील भी खारिज हो गई है ।
अपीलकर्ता के वकील चेतन जादोन ने तर्क दिया कि चूंकि राज्य बार काउंसिल द्वारा प्रतिवादी को व्यावसायिक कदाचार का दोषी ठहराए बिना शिकायत का निपटारा करने का आधार यह था कि प्रतिवादी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर अभी भी निर्णय नहीं हुआ था, इसलिए अब इसकी प्रासंगिकता समाप्त हो गई है, क्योंकि अपील पर निर्णय हो चुका है और प्रतिवादी को धोखाधड़ी और गलत बयानी सहित विभिन्न अपराधों का दोषी ठहराया गया है।

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया की अनुशासन समिति ने 15/10/24 को दिए अपने आदेश में माना कि अभय प्रताप सिंह ने मनोज कुमार शर्मा के नाम से शिक्षा प्राप्त की थी और फिर अभय प्रताप सिंह के नाम से वकील के रूप में प्रैक्टिस कर रहे थे। यह पाया गया कि उन्होंने बार काउंसिल में नामांकन के लिए धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा किया था।
इसलिए उन्हें पेशेवर कदाचार का दोषी मानते हुए राज्य बार काउंसिल के आदेश को रद्द करते हुए अभय प्रताप सिंह दो साल के लिए बार काउंसिल से निलंबित कर दिया ।
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इसके अतिरिक्त, समिति ने राज्य बार काउंसिल के सचिव को निर्देश दिया कि वह अभय प्रताप सिंह के नामांकन रिकॉर्ड की जांच करें और यदि इसमें धोखाधड़ी का कोई तत्व पाया जाता है, तो उनके नामांकन को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करे तथा धोखाधड़ी और अधिवक्ता अधिनियम की धारा 26 (1) के तहत उसके खिलाफ कार्यवाही भी शुरू की जाए ।बीसीआई के निर्णय की सूचना सभी संबंधित व्यक्तियों को भेजी जाए ।
इस निर्णय के साथ, सीबीआई की डिसिप्लिनरी कमेटी ने एक सख्त संदेश दिया है कि पेशेवर कदाचार और धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Order / Judgement – Order-Judgement
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