आगरा ।
आगरा में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी ) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में, गिरीशा देवी और उनके परिवार को राष्ट्रीय बीमा कंपनी (नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी ) से 93,70,330/- रुपये का मुआवज़ा दिलाए जाने का आदेश दिया है।
यह फैसला मोटर वाहन याचिका संख्या-389/2018 के तहत सुनाया गया है, जिसे श्रीमती गिरीशा देवी ने अपने दिवंगत पति उमाशंकर सिंह जो कि आर्मी में लॉस हवलदार थे की मृत्यु के बाद दायर किया था।
दुर्घटना का विवरण:
यह दुर्घटना 19 दिसंबर 2017 को शाम 7:00 बजे हुई थी, जब उमाशंकर सिंह अपनी मोटरसाइकिल से एत्मादपुर से अपने घर बिचपुरी जा रहे थे। नगला हरमुख के पास, एक ट्रैक्टर के चालक ने तेज और लापरवाही से वाहन चलाते हुए उमाशंकर सिंह की मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी।
टक्कर के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया। दुर्घटना के कारण उमाशंकर सिंह को गंभीर चोटें आईं और 2 अप्रैल 2018 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
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याचिकाकर्ता और प्रतिवादी:
* याचिकाकर्ता:
* श्रीमती गिरीशा देवी (उम्र 38 वर्ष), मृतक की पत्नी।
* अनिल कुमार चौहान (उम्र 14 वर्ष), मृतक का पुत्र।
* नेत्रपाल सिंह चौहान (उम्र 13 वर्ष), मृतक का पुत्र।
* श्योप्रसाद (उम्र 77 वर्ष), मृतक के पिता (याचिका के दौरान मृत्यु हो गई)।
* प्रतिवादी:
* दि नेशनल इन्श्योरेन्श कंपनी लिमिटेड, बीमा कंपनी।
* राकेश कुमार, वाहन का मालिक।
* मनोज कुमार, वाहन का चालक।
न्यायालय का फैसला:
अधिकरण ने पाया कि दुर्घटना ट्रैक्टर चालक की लापरवाही के कारण हुई थी और इस बात के पर्याप्त सबूत थे। अदालत ने दुर्घटना के चश्मदीद गवाह महेंद्र सिंह के बयान को महत्वपूर्ण माना, जिन्होंने बताया कि ट्रैक्टर चालक ने तेज और लापरवाही से वाहन चलाया और मोटरसाइकिल को टक्कर मारी।
न्यायालय ने यह भी पाया कि बीमा कंपनी योगदायी उपेक्षा (कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस ) को साबित करने में विफल रही। इसके अलावा, यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि दुर्घटना के समय ट्रैक्टर चालक के पास वैध लाइसेंस था और वाहन का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के साथ था।
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मुआवजे की राशि:
अधिकरण ने मृतक की आयु 39 वर्ष, मासिक वेतन लगभग 55,471/- रुपये और भविष्य की आय को ध्यान में रखते हुए 93,70,330/- रुपये का कुल मुआवज़ा निर्धारित किया है।
इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
* आर्थिक हानि के लिए: 62,00,220/- रुपये।
* भविष्य की आय का 50%: 31,00,110/- रुपये।
* अंतिम संस्कार, चिकित्सा खर्च, और अन्य नुकसान के लिए: 70,000/- रुपये।
कुल मुआवज़ा राशि पर 7% साधारण ब्याज भी लगाया गया है, जो याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान की तारीख तक देय होगा।
बीमा कंपनी को आदेश दिया गया है कि वह 30 दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करे। राशि का एक हिस्सा सावधि जमा (एफडीआर) के रूप में रखा जाएगा, जबकि शेष राशि याचिकाकर्ताओं को दे दी जाएगी।
हालांकि ट्रैक्टर में ट्रॉली लगी होने पर अदालत ने इसे बीमा की शर्तों का उल्लंघन माना है और आदेश दिया है कि बीमा कंपनी न्यायालय में राशि जमा करने के उपरांत सम्पूर्ण राशि ट्रैक्टर ट्राली के स्वामी से वसूल कर सकती है ।
मृतक उमा शंकर सिंह के परिवार के ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सिंघल, राघव सिंघल और जे.पी. शर्मा ने प्रभावी पैरवी की ।
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