एसएसपी अलीगढ़ को चेतावनी’दारोगा को भेजें या खुद पेश होकर स्पष्टीकरण दें’
आगरा।
अदालत की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने और गवाही के लिए पुलिसकर्मी को अनुमति न देने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे -13) माननीय महेश चंद वर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने एसएसपी (SSP) अलीगढ़ को स्पष्ट आदेश दिया है कि वह या तो संबंधित उपनिरीक्षक को गवाही के लिए हाजिर कराएं, अन्यथा स्वयं अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
क्या है पूरा मामला ?
ताजगंज थाने से संबंधित वर्ष 2011 का एक मामला (राज्य बनाम सत्यवीर आदि), जो हत्या और आयुध अधिनियम (Arms Act) की धाराओं के तहत दर्ज है, एडीजे -13 की अदालत में विचाराधीन है।
इस मामले में उपनिरीक्षक इंद्रधनुष की गवाही होनी अनिवार्य है, जिसके लिए अदालत द्वारा बार-बार समन जारी किए जा रहे हैं।
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‘अधिकारी नहीं दे रहे अनुमति’:
मामले में मोड़ तब आया जब कोर्ट पेरोकार ने उपनिरीक्षक इंद्रधनुष से फोन पर संपर्क कर गवाही के लिए आने को कहा।
इसके जवाब में उपनिरीक्षक ने कथित तौर पर कहा कि उनके उच्च अधिकारी उन्हें अदालत में गवाही देने जाने की अनुमति नहीं प्रदान कर रहे हैं।
अदालत का सख्त रुख और एसएसपी को निर्देश:
जब यह बात न्यायाधीश माननीय महेश चंद वर्मा के संज्ञान में आई, तो उन्होंने इसे न्यायालय की कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालना माना।
अदालत ने एसएसपी अलीगढ़ को निर्देशित करते हुए कहा है कि:
* नियत तिथि पर उपनिरीक्षक इंद्रधनुष की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
* यदि उपनिरीक्षक हाजिर नहीं होते हैं, तो एसएसपी स्वयं अदालत में पेश हों।
* एसएसपी यह स्पष्ट करें कि क्यों न उनके विरुद्ध ‘आपराधिक अवमानना’ (Criminal Contempt) की कार्यवाही के लिए मामला उच्च न्यायालय को संदर्भित कर दिया जाए।
न्यायालय के इस सख्त आदेश से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। अब यह देखना होगा कि आगामी तिथि पर पुलिस प्रशासन उपनिरीक्षक को गवाही के लिए भेजता है या एसएसपी को स्वयं स्पष्टीकरण देना पड़ता है।
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