आगरा १६ जून ।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) माननीय नीरज कुमार बक्शी ने लूट, हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं में आरोपित महेश चंद और राजू गोला को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। यह मामला लगभग 14 साल पुराना था।
मामले के अनुसार, वादी श्याम बाबू, निवासी नगला हरमुखा, थाना हरीपर्वत, आगरा, ठेकेदारी का काम करते थे। महेश चंद (पुत्र जनक सिंह, निवासी ककरैठा, थाना सिकंदरा) और राजू गोला (पुत्र भगवान स्वरूप, निवासी श्याम नगर, थाना एत्माद्दौला) सहित नरेश और सुनील उनके अधीन काम करते थे। वादी ने इन आरोपियों को एडवांस के रूप में हजारों रुपये दिए थे।
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शिकायत के अनुसार, एडवांस लेने के बाद भी जब आरोपी काम पर नहीं आए और वादी ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने पैसे देने से इंकार कर दिया और भविष्य में पैसे मांगने पर गोली मारने की धमकी दी।
जब वादी ने पुलिस में शिकायत की, तो आरोपी कथित तौर पर बौखला गए। 20 मई, 2011 को आरोपियों ने वादी के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की। जान से मारने की नीयत से किए गए फायर से वादी बाल-बाल बच गया, लेकिन आरोपी महेश ने वादी के सिर पर फरसे से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
पुलिस द्वारा मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (एफ.आर.) लगाए जाने के बाद, वादी ने आरोपियों के खिलाफ एक परिवाद प्रस्तुत किया। आरोपी नरेश और सुनील की फाइलें वर्ष 2015 में अलग कर दी गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप केवल महेश चंद और राजू गोला पर ही विचारण हुआ। इस मामले में वादी, उनके साथ काम करने वाले दो कर्मी बबलू और जयप्रकाश वाजपेयी, और डॉ. ए.के. उपाध्याय को गवाह के तौर पर अदालत में पेश किया गया।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) माननीय नीरज कुमार बक्शी ने आरोपियों के अधिवक्ता राजवीर शुक्ला और शुभायु गुप्ता के तर्कों पर गौर किया।
अदालत ने स्वतंत्र गवाहों की कमी और पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त तमंचा, कारतूस और फरसे की बरामदगी करने में विफल रहने को देखते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
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