चेक बाउंस मामले में देरी पर अदालत का सख्त रुख: वादी को अंतरिम प्रतिकर दिलाने का आदेश

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आगरा।

चेक डिसऑनर के मामलों में हो रही देरी को देखते हुए न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को बड़ी राहत प्रदान की है।

अतिरिक्त न्यायालय संख्या-1 के पीठासीन अधिकारी माननीय आर.बी.एस. मौर्या ने मुकदमे के निस्तारण में विलंब का संज्ञान लेते हुए वादी को अंतरिम प्रतिकर दिलाने का आदेश जारी किया है।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

प्रकरण के अनुसार, वादी ‘श्री राम पैकेजिंग’ के अधिकृत प्रतिनिधि ने वर्ष 2021 में ‘मेसर्स अर्शी पैकेजिंग’ के मालिक के विरुद्ध चेक बाउंस होने के आरोपों में वाद दायर किया था। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे में वादी को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा था।

विधिक संशोधन और अधिवक्ता के तर्क:

सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि चेक बाउंस के मामलों में त्वरित राहत प्रदान करने के लिए परकाम्य लिखित अधिनियम (NI Act) में वर्ष 2018 में संशोधन किया गया था।

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इस संशोधन की धारा 143-A के तहत न्यायालय को यह अधिकार है कि वह मुकदमे के लंबित रहने के दौरान ही वादी को अंतरिम राहत दिला सके।

अदालत का फैसला और गणना:

अदालत ने वादी के तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि मुकदमे के निस्तारण में हो रही देरी के कारण वादी अंतरिम प्रतिकर का हकदार है।

न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश पारित किए:

* चेक की कुल राशि: 1 लाख 55 हजार रुपये।

* अंतरिम प्रतिकर की दर: कुल राशि का 20 प्रतिशत।

* देय राशि: 31,000/- रुपये।

* समय सीमा: विपक्षी को यह राशि 60 दिन के भीतर वादी को भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

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विवेक कुमार जैन
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