आगरा।
चेक डिसऑनर (Check Dishonour) के एक पुराने मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-7) माननीय अनुज कुमार सिंह ने आरोपी मनोज कुमार जैन को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 30 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
क्या था पूरा मामला ?
मामले के अनुसार, ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी वादी पवन कुमार गुप्ता और आरोपी मनोज कुमार जैन (निवासी तेज नगर, कमला नगर) के बीच गहरे पारिवारिक और मित्रता के संबंध थे।
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इसी मित्रता के नाते, आरोपी ने वर्ष 2017 में वादी से 20 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोपी ने वादा किया था कि वह दो वर्ष के भीतर लाभांश (Profit) सहित यह राशि वापस कर देगा।
धोखाधड़ी और चेक बाउंस:
समयावधि समाप्त होने के बाद जब वादी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। काफी दबाव के बाद, 1 दिसंबर 2022 को आरोपी ने 20 लाख रुपये का एक चेक वादी को सौंपा। जब वादी ने इस चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह डिसऑनर (बाउंस) हो गया।
न्यायालय का फैसला:
वादी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने अदालत में प्रभावी पैरवी करते हुए तर्क दिया कि आरोपी की नीयत शुरू से ही पैसा हड़पने की थी।
साक्ष्यों और दलीलों का अवलोकन करने के बाद, मजिस्ट्रेट माननीय अनुज कुमार सिंह ने माना कि आरोपी ने चेक बाउंस कर कानून का उल्लंघन किया है।
अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए न केवल जेल भेजने का आदेश दिया, बल्कि 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो मूल राशि से 10 लाख रुपये अधिक है।
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