आगरा:
न्याय के पहिये भले ही धीमे चलते हों, लेकिन अटूट विश्वास और निरंतर पैरवी से जीत संभव है। आगरा के थाना न्यू आगरा से जुड़े धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में,
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-6) माननीय आतिफ सिद्दीकी की अदालत ने पुलिस द्वारा लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (FR) को तीसरी बार निरस्त कर दिया है।
अदालत ने थानाध्यक्ष न्यू आगरा को मामले की अग्रिम विवेचना (Further Investigation) कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
कमला नगर निवासी कान्ता प्रसाद अग्रवाल ने वर्ष 2013 में राकेश गर्ग एवं अन्य के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र के तहत कंपनी हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी का आरोप था कि विपक्षियों ने फर्जी कागजातों के सहारे उनकी कंपनी पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया।
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पुलिस की भूमिका और वादी का संघर्ष:
हैरानी की बात यह रही कि पिछले 11 वर्षों में विवेचकों ने इस मामले में तीन बार क्लोजर रिपोर्ट (FR) लगाकर आरोपियों को राहत देने की कोशिश की।
पुलिस की इस “लीपापोती” के खिलाफ वादी ने हार नहीं मानी और अदालत में लगातार अपनी आपत्ति (Protest Petition) दर्ज कराते रहे।
अदालत का फैसला:
सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता रोहित अग्रवाल ने पुरजोर तरीके से तर्क रखे कि विवेचक ने साक्ष्यों को नजरअंदाज कर आरोपियों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से रिपोर्ट लगाई है।
तर्कों से सहमत होते हुए, मजिस्ट्रेट ने पुलिस की रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया और मामले की गहराई से दोबारा जाँच करने के निर्देश दिए।
मुख्य बिंदु:
* केस दर्ज: वर्ष 2013, थाना न्यू आगरा।
* धाराएं: धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र।
* विवाद: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनी हड़पना।
* अदालती आदेश: पुलिस की FR निरस्त, दोबारा होगी जाँच।
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