आगरा।
जनपद की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सामूहिक दुराचार और भारी मात्रा में जेवरात चोरी करने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे दो सगे भाइयों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
एडीजे माननीय यशवंत कुमार सरोज (फास्ट ट्रैक कोर्ट-1) ने साक्ष्यों के पूर्णतया अभाव और मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि न होने के आधार पर यह फैसला सुनाया।
क्या थे गंभीर आरोप ?
थाना ताजगंज में दर्ज मामले के अनुसार, वादिनी ने आरोप लगाया था कि आरोपी यशपाल और उसके बहनोई शंकर ने करीब दो साल पहले उसे नशीला प्रसाद खिलाकर उसके साथ बेहोशी की हालत में दुराचार किया था।
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पीड़िता का दावा था कि:
* आरोपियों ने आपत्तिजनक फोटो खींचकर उसे ब्लैकमेल किया और कई बार सामूहिक दुराचार किया।
* आरोपी यशपाल ने उसके घर से 1 किलो 400 ग्राम सोने के जेवर और 20 किलो चांदी के जेवर व सिक्के चोरी कर लिए।
* विरोध करने पर आरोपियों ने रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी।
कोर्ट में क्यों कमजोर पड़ा मामला ?
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनोद कुमार राजपूत ने मजबूती से तर्क रखे, जिसके बाद अदालत ने पाया कि आरोपों में सत्यता के प्रमाण नहीं हैं:
* मेडिकल रिपोर्ट: गवाही के दौरान डॉ. शैली सिंह ने स्पष्ट किया कि मेडिकल परीक्षण में पीड़िता के साथ सामूहिक दुराचार की पुष्टि नहीं हुई है।
* बरामदगी का अभाव: पुलिस आरोपियों के पास से कथित तौर पर चोरी किए गए भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर बरामद करने में पूरी तरह विफल रही।
* साक्ष्यों की कमी: विवेचना और गवाही के दौरान ऐसे कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके जो आरोपियों को दोषी सिद्ध कर सकें।
अदालत का फैसला:
न्यायाधीश ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आरोपी भाई यशपाल और सुरेश (पुत्रगण चतुरी, निवासी बसई खुर्द) को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और बरामदगी न होने को भी महत्वपूर्ण माना गया।
इस मामले में पीड़िता, उसके भाई, डॉक्टर और पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों की गवाही दर्ज की गई थी, लेकिन वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्य न होने के कारण केस टिक नहीं सका।
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