आगरा उपभोक्ता अदालत प्रथम का बड़ा फैसला: ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले युवक को बीमा कंपनी देगी 66 लाख रुपये से अधिक का भुगतान

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आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी (Niva Bupa Health Insurance Co. Ltd.) को आदेश दिया है कि वह एक दुर्घटना पीड़ित को बीमा राशि और ब्याज समेत कुल 66 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करे।

अदालत ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने को ‘सेवा में कमी’ माना है।

मामले की पृष्ठभूमि: एक दर्दनाक हादसा

यह मामला प्रांजल गुप्ता से जुड़ा है, जिन्होंने मार्च 2019 में तत्कालीन मैक्स बूपा (अब नीवा बूपा) से 50 लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी।

27 दिसंबर 2019 को कालिंदी एक्सप्रेस से यात्रा के दौरान हाथरस जंक्शन के पास प्रांजल ट्रेन से नीचे गिर गए।

इस भीषण हादसे में उनकी दोनों टांगे कट गईं और वे 80 प्रतिशत स्थाई रूप से विकलांग हो गए।

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बीमा कंपनी का रुख और विवाद:

हादसे के बाद जब प्रांजल ने क्लेम पेश किया, तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमा पॉलिसी की जानकारी छिपाई थी और अपनी वार्षिक आय गलत बताई थी। कंपनी का तर्क था कि यह पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।

उपभोक्ता आयोग का निर्णय:

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा:

* शर्तों की जानकारी: कंपनी ने ऐसा कोई सबूत नहीं दिया कि पॉलिसी बेचते समय ग्राहक को पुरानी पॉलिसी होने पर क्लेम न मिलने जैसी किसी शर्त के बारे में बताया गया था।

* आय का विवरण: आय में मामूली अंतर (4.55 लाख बनाम 5 लाख) को क्लेम खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

* अधिकार: पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, दोनों पैर गंवाने पर 100 प्रतिशत बीमा राशि (50 लाख रुपये) का भुगतान अनिवार्य है।

मुआवजे का विवरण:

आयोग ने 21 फरवरी 2025 को अपने निर्णय में निम्नलिखित आदेश दिए थे:

* बीमा राशि: 50,00,000/- रुपये।

* चिकित्सा व्यय: 1,00,000/- रुपये।

* ब्याज: 21 जनवरी 2021 से 6% वार्षिक साधारण ब्याज (देरी होने पर 9%)।

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* मानसिक क्षतिपूर्ति: 1,00,000/- रुपये।

* वाद व्यय: 20,000/- रुपये।

ताज़ा स्थिति: भुगतान की प्रक्रिया

दिसंबर 2025 में हुई राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष कुल 66,16,439/- रुपये (छांछठ लाख सोलह हजार चार सौ उनतालीस रुपये) जमा करा दिए हैं।

आयोग ने अब इस धनराशि का एकाउंटपेई चेक परिवादी प्रांजल गुप्ता को दिनांक 18 दिसम्बर 2025 को परिवादी को आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने सौंप दिया । परिवादी के केस की प्रभावी पैरवी अधिवक्ता कायम सिंह ने की ।

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विवेक कुमार जैन
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