आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार सिंह ने आगरा ने एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी और उनकी पत्नी को चिकित्सा खर्च के लिए ₹2,39,534/- का भुगतान करने का आदेश दिया है।
आयोग ने केनरा बैंक (पूर्व में सिंडीकेट बैंक), द यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और विडाल हेल्थ टी.पी.ए. को संयुक्त रूप से और अलग-अलग इस राशि का भुगतान 6% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया है।
यह निर्णय एच.बी.एस. यादव और उनकी पत्नी श्रीदेवी यादव द्वारा दायर एक शिकायत पर 8 सितंबर, 2025 को सुनाया गया।
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मामले का विवरण:
शिकायतकर्ता एच.बी.एस. यादव, जो 31 जनवरी, 2013 को सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) से प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, ने बैंक द्वारा संचालित ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के तहत अपनी पत्नी के साथ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी।
यह पॉलिसी ₹4,00,000/- तक की चिकित्सा लागत को कवर करती थी। शिकायतकर्ता ने समय-समय पर प्रीमियम का भुगतान किया था।
नवंबर 2018 में, जब उनकी पत्नी, श्रीमती श्रीदेवी यादव, को महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया, तो उनके इलाज में कुल ₹2,39,534/- का खर्च आया।
शिकायतकर्ताओं ने बीमा कंपनी और बैंक से इस राशि के लिए दावा (क्लेम) किया, लेकिन उनके दावे का निपटारा नहीं किया गया। बैंक ने तर्क दिया कि वर्ष 2017-2018 के लिए पॉलिसी का प्रीमियम नहीं काटा गया था, और इस कारण पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं हुआ था।

आयोग का निर्णय:
आयोग ने पाया कि बैंक द्वारा दिया गया यह तर्क सही नहीं था। शिकायतकर्ता ने 29 जुलाई, 2017 को ही बैंक को प्रीमियम की ऑटो कटौती के लिए एक अंडरटेकिंग (सहमति पत्र) दिया था।
हालाँकि बैंक ने कहा कि उनके पास इस अंडरटेकिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं है, आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ों पर विश्वास किया।
आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि बैंक ने प्रीमियम की स्वतः कटौती न करके ‘अनुचित व्यापार संव्यवहार’ (अनुचित व्यापार व्यवहार) और ‘सेवा में कमी’ की है। शिकायतकर्ता ने अपनी पत्नी के इलाज के सभी बिल और अस्पताल के दस्तावेज़ प्रस्तुत किए, जिससे यह साबित हुआ कि वे बीमा राशि पाने के हकदार हैं।
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आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिपक्षी (बैंक और बीमा कंपनी) 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को चिकित्सा क्षतिपूर्ति की राशि ₹2,39,534/- का भुगतान करें।
इसके अतिरिक्त, उन्हें मानसिक पीड़ा के लिए ₹10,000/- और वाद व्यय (कानूनी खर्च) के लिए ₹5,000/- भी देने होंगे। यदि वे इस आदेश का पालन करने में विफल रहते हैं, तो पूरी राशि पर 6% के बजाय 9% वार्षिक साधारण ब्याज लगेगा।
Attachment/Order/Judgement – hbs
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