आगरा, १५ जुलाई
दृष्टि आईएएस के प्रबंध निदेशक (एमडी ) विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ अधिवक्ताओं को ‘गिद्ध’ कहने और न्यायपालिका के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है।
आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आज (15 जुलाई, 2025) एसीजेएम -10 माननीय मोहम्मद साजिद के न्यायालय, आगरा में यह परिवाद दायर किया।
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें विकास दिव्यकीर्ति उच्च न्यायालय, जिला न्यायाधीश और अधिवक्ताओं के लिए “काफी अपमानजनक भाषा” का प्रयोग कर रहे हैं।
सिंह के अनुसार, वीडियो में दिव्यकीर्ति यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि:
* “हाईकोर्ट में 50% जज सीधे अधिवक्ता नियुक्ति किए जाते हैं, जिसके लिए बहुत जुगाड़ चाहिए। वैकेंसी 2-3 साल में 1 आती है और गिद्ध 500 होते हैं।”
* “डिस्ट्रिक्ट जज डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को डांट सकता है, अकेले में डांट खा भी लेता होगा। डिस्ट्रिक्ट जज पावरफुल है लेकिन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जितना नहीं।”
* “न्यायपालिका की सारी ताकत इस भरोसे पर है कि एसपी मेरी बात मानेगा। जज बोलेगा अरेस्ट करो, एसपी बोलेगा नहीं, खुद ही कर लो, सारी ताकत खत्म।”
* एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा,
“बड़ी सिंपल सी बात है कि एसपी है, उसने एक अपराधी को पकड़ा और वह कल जमानत के लिए जा रहा है, बहुत तगड़ा वकील लेकर गया है दिल्ली से और एसपी को पता है इसे छोड़ना ठीक नहीं रहेगा। मैंने सुना है कि एसपी साहब रात को डीजे साहब को फोन कर देते हैं, कौन डीजे ? डीजे वाले बाबू नहीं, डिस्ट्रिक्ट जज। बताते हैं सर ऐसा मामला है, बहुत ही खतरनाक क्रिमिनल है, हमारे पास एविडेंस है, आई रिक्वेस्ट यू प्लीज डोंट गिव हिम बेल। जनरली उसके बाद बेल नहीं मिलती।”
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने जोर देकर कहा कि दिव्यकीर्ति द्वारा अधिवक्ताओं के लिए ‘गिद्ध’ शब्द का प्रयोग और उनकी भाषा माननीय उच्च न्यायालय तथा माननीय जिला न्यायाधीश की गरिमा के विरुद्ध है, जो कि स्पष्ट रूप से मानहानिकारक है। इसी आधार पर यह परिवाद दायर किया गया है।
माननीय न्यायालय ने सुनवाई के बाद इस परिवाद को एक प्रकीर्ण वाद (मिसलेनियस केस ) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश सिकरवार, एस.पी. सिंह सिकरवार और राहुल सोलंकी भी उपस्थित रहे।
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