युवती को अकारण बालगृह में रखने का मामला
आगरा /प्रयागराज 20 अक्टूबर ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाली युवती को बेवजह बाल गृह (बालिका), बलिया में दो वर्ष नौ माह तक रखने को गैर-कानूनी करार दिया है और कहा कि इस अवैध निरूद्धि के लिए पीड़िता नियमानुसार कार्यवाही करने को स्वतंत्र है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान तथा न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने मऊ निवासिनी युवती की दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

मामला मऊ के मधुबन थाना क्षेत्र का है। बलिया की युवती प्रेम विवाह के बाद पति के साथ हैदराबाद में रह रही थी। परिजनों ने उसके पति के खिलाफ अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने युवती की बरामदगी कर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया था। तब से वह बाल गृह (बालिका), बलिया में निरूद्ध थी।
कोर्ट ने तीन अक्तूबर को बाल कल्याण समिति, मऊ के अध्यक्ष से पूछा था कि युवती को बाल गृह में दो वर्ष 9 महीने तक क्यों रखा गया है। इस पर अध्यक्ष ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि बंदी नाबालिग थी।
Also Read – चैक डिसऑनर आरोपी को 6 माह की कैद
वह अपने माता-पिता के साथ जाने को तैयार नहीं थी। माता-पिता भी उसकी इच्छा के खिलाफ सुपुर्दगी नहीं लेना चाहते थे। हालांकि, अब उसे स्वतंत्र कर दिया गया है।
कोर्ट ने सफाई को संतोषजनक न मानते हुए कहा कि युवती को बेवजह बाल गृह (बालिका), बलिया में दो वर्ष नौ माह तक हिरासत में रखना गैर-कानूनी है। इसके लिए युवती नियमानुसार कार्यवाही करने को स्वतंत्र है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin- नोएडा मजदूर आंदोलन में पत्रकार पर एनएसए लगाने का मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और डीएम-सीपी से मांगा जवाब - September 17, 2026
- गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका, सीबीआई जांच का अनुरोध - September 17, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट: फर्जी वसीयत और संपत्ति विवाद मामले में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के चचेरे भाई की गिरफ्तारी पर रोक - September 12, 2026




