‘आप राहत देने से इनकार करने वाले जज के खिलाफ इन-हाउस जांच की मांग नहीं कर सकते’: सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़

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सीजेआई ने याचिकाकर्ता को लगाई डांट,
यहां “याह याह याह”न कहें। यस कहें। यह कोई कॉफी शॉप नहीं है। यह न्यायालय है। मुझे “याह याह” कहने वाले लोगों से थोड़ी एलर्जी है।”

आगरा / नई दिल्ली 01 अक्टूबर ।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार (30 सितंबर) को वादी द्वारा राहत न देने के लिए जज के खिलाफ इन-हाउस जांच की मांग करने पर आपत्ति जताई है।

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वादी, जो व्यक्तिगत पक्ष है, याचिका का उल्लेख कर रहा था, जिसमें उसने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा था। उन्होंने कहा कि याचिका मई 2018 में दायर की गई थी।

याचिका पर आश्चर्य और निराशा व्यक्त करते हुए सीजेआई ने पक्षकार से कहा:

“आप जज को प्रतिवादी बनाकर जनहित याचिका कैसे दायर कर सकते हैं? कुछ गरिमा होनी चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि मैं जज के खिलाफ इन-हाउस जांच चाहता हूं। जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं। वह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की पोस्ट से रिटायर हुए। आप यह नहीं कह सकते कि मैं जज के खिलाफ इन-हाउस जांच चाहता हूं, क्योंकि आप पीठ के समक्ष सफल नहीं हुए। क्षमा करें, हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते।”

वादी ने कहा कि जस्टिस गोगोई ने अवैध बयान का हवाला देते हुए सेवा से बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए उनकी याचिका गलत तरीके से खारिज की और कहा कि फैसले में “कानून की घोर त्रुटियां” हैं।

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सीजेआई ने उनसे कहा,

“सही या गलत, सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय है। आपकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई। अब आपको क्यूरेटिव दाखिल करना है। लेकिन आप कहते हैं कि आप क्यूरेटिव दाखिल नहीं करना चाहते हैं।”

जब याचिकाकर्ता, जिसने कहा कि वह पुणे का रहने वाला है, मराठी में दलीलें देने लगा तो सीजेआई ने भी उसी भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया। मराठी में सीजेआई ने पक्षकार को यह समझाने की कोशिश की कि किसी जज के खिलाफ केवल राहत देने से इनकार करने पर याचिका दायर नहीं की जा सकती।

सीजेआई ने स्पष्ट किया कि जब किसी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो मामले का फैसला करने वाले हाईकोर्ट जज को पक्षकार नहीं बनाया जाता।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने पक्षकार से कहा कि अगर वह जस्टिस गोगोई का नाम प्रतिवादियों की सूची से हटा देते हैं तो रजिस्ट्री इस पर विचार करेगी। पक्षकार ऐसा करने के लिए सहमत हो गया।

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न्यायालय में “याह याह याह” न कहें

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने याचिकाकर्ता को अनौपचारिक “याह याह” का उपयोग करने के लिए फटकार भी लगाई।

सीजेआई ने उससे कहा,

“याह याह याह”न कहें। यस कहें। यह कोई कॉफी शॉप नहीं है। यह न्यायालय है। मुझे “याह याह” कहने वाले लोगों से थोड़ी एलर्जी है।”

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साभार: लाइव लॉ

विवेक कुमार जैन
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